नज़र की फ़त्ह कभी क़ल्ब की शिकस्त लगे
नज़र की फ़त्ह कभी क़ल्ब की शिकस्त लगे
मिरी हयात पराए का बंद-ओ-बस्त लगे
न वो नुक़ूश न हुस्न-ए-कशिश की बात रही
सनम-फ़रोश भी जैसे ख़ुदा-परस्त लगे
अभी मिला था अभी फिर बिछड़ गया कोई
ये हादसा भी हिकायात-ए-बूद-ओ-हस्त लगे
फ़रिश्ते देख रहे हैं ज़मीन ओ चर्ख़ का रब्त
ये फ़ासला भी तो इंसाँ की एक जस्त लगे
वहाँ सफ़ीने को पहुँचा दिया है तूफ़ाँ ने
हर एक मौज-ए-बला अब जहाँ से पस्त लगे
तिरे ही ग़म ने किसी सम्त देखने न दिया
कि अब हुजूम-ए-तमन्ना भी तंग-दस्त लगे
जो तेरी बज़्म से 'बेकल' चला तो होश में था
अजीब बात है अब वो भी मस्त मस्त लगे
(1388) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
बेकल उत्साही