गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं

गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं

चमन में याद-ए-चमन के सिवा कुछ और नहीं

कहाँ की मंज़िल-ए-रंगीं सहर तो होने दो

हमारे ख़्वाब थकन के सिवा कुछ और नहीं

ये शाम-ए-ग़ुर्बत-ए-दिल है यहाँ चराग़ कहाँ

ख़याल-ए-सुब्ह-ए-वतन के सिवा कुछ और नहीं

निगाह-ए-शौक़-ए-मुसलसल उसी को छेड़े जा

जबीं पे जिस की शिकन के सिवा कुछ और नहीं

दयार-ए-इश्क़ में तुम क्यूँ खड़े हो अहल-ए-हवस

यहाँ तो दार-ओ-रसन के सिवा कुछ और नहीं

सवाद-ए-शाम-ए-ख़िज़ाँ है तो हो हमें क्या ग़म

नज़र में सुब्ह-ए-चमन के सिवा कुछ और नहीं

करे तलाश जुनूँ ज़ुल्मत-ए-ख़िरद से कहो

जुनूँ किरन है किरन के सिवा कुछ और नहीं

हमारी नग़्मा-सराई के वास्ते 'दर्शन'

हवा-ए-गंग-ओ-जमन के सिवा कुछ और नहीं

(1223) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554