ख़ुशी से रंज का बदला यहाँ नहीं मिलता

ख़ुशी से रंज का बदला यहाँ नहीं मिलता

वो मिल गए तो मुझे आसमाँ नहीं मिलता

हज़ार ढूँडिए उस का निशाँ नहीं मिलता

जबीं मिले तो मिले आस्ताँ नहीं मिलता

मजाज़ और हक़ीक़त कुछ और है यानी

तिरी निगाह से तेरा बयाँ नहीं मिलता

भड़क के शोला-ए-गुल तू ही अब लगा दे आग

कि बिजलियों को मिरा आशियाँ नहीं मिलता

वो बद-गुमाँ कि मुझे ताब-ए-रंज ज़ीस्त नहीं

मुझे ये ग़म कि ग़म-ए-जावेदाँ नहीं मिलता

तिरी तलाश काफ़ी-उल-जुमला मा-हसल ये है

कि तू यहाँ नहीं मिलता वहाँ नहीं मिलता

बता अब ऐ जरस-ए-दौर मैं किधर जाऊँ

निशान-ए-गर्द-ए-रह-ए-कारवाँ नहीं मिलता

मुझे बुला के यहाँ आप छुप गया कोई

वो मेहमाँ हूँ जिसे मेज़बाँ नहीं मिलता

तुझे ख़बर है तिरे तीर-ए-बे-पनाह की ख़ैर

बहुत दिनों से दिल-ए-ना-तवाँ नहीं मिलता

किसी ने तुझ को न जाना मगर ये कम जाना

ये राज़ है कि कोई राज़-दाँ नहीं मिलता

मुझे अज़ीज़ सही क़द्र-ए-दिल तुम्हें क्यूँ हो

कमी तो दिल की नहीं दिल कहाँ नहीं मिलता

दयार-ए-उम्र में अब क़हत-ए-मेहर है 'फ़ानी'

कोई अजल के सिवा मेहरबाँ नहीं मिलता

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