ज़माना झुक गया होता अगर लहजा बदल लेते
ज़माना झुक गया होता अगर लहजा बदल लेते
मगर मंज़िल नहीं मिलती अगर रस्ता बदल लेते
बहुत ताज़ा हवा आती बहुत से फूल खिल जाते
मकान-ए-दिल का तुम अपने अगर नक़्शा बदल लेते
ख़ता तुम से हुई आख़िर तुम्हारा क्या बिगड़ जाता
ये बाज़ी भी तुम्हारी थी अगर मोहरा बदल लेते
अभी तो आइने से है मुसलसल दोस्ती अपनी
शनासाई कहाँ रहती अगर चेहरा बदल लेते
मिरे हर्फ़ों के ये मोती मिरे हाथों बिखर जाते
ग़ुबार बे-यक़ीनी में अगर रस्ता बदल लेते
फ़लक के इस किनारे का वो लम्हा हम को मिल जाता
मिला था एक ही लम्हा अगर लम्हा बदल लेते
बहुत बे-रंग चेहरों पर बहुत से रंग आ जाते
किसी अच्छे फ़साने से अगर क़िस्सा बदल लेते
इसी ख़्वाहिश के दामन में वही सिक्के खनक उठते
सदा तब्दील कर लेते अगर कासा बदल लेते
(1705) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
फ़रह इक़बाल