कुछ नहीं गरचे तिरी राहगुज़र से आगे

कुछ नहीं गरचे तिरी राहगुज़र से आगे

देखना कुफ़्र नहीं हद्द-ए-नज़र से आगे

ख़ुद-फ़रेबी के लिए गर्म-ए-सफ़र हैं वर्ना

क्या है मंज़िल के सिवा गर्द-ए-सफ़र से आगे

मेरा अफ़्लाक भी तस्कीन-ए-नज़र हो न सका

थे वही शम्स-ओ-क़मर शम्स-ओ-क़मर से आगे

ज़िंदगी वक़्त की दीवारों में महबूस रही

कोई पर्दा न उठा शाम-ओ-सहर से आगे

आज के दौर का दावा है कि अन्क़ा के सिवा

कोई उक़्दा नहीं इरफ़ान-ए-बशर से आगे

क़तरे क़तरे को तरसते रहे सहरा 'फ़ारिग़'

झूम कर उठ्ठे भी बादल तो वो बरसे आगे

(931) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554