पहले जो हम चले तो फ़क़त यार तक चले
पहले जो हम चले तो फ़क़त यार तक चले
फिर फ़न से ले के हुजरा-ए-फ़नकार तक चले
बुत-ख़ाना-ए-जहान से इंकार है मुझे
लेकिन वो क्या हुए थे जो इंकार तक चले
महव-ए-ख़याल तेरी तजल्ली में क्या हुए
मूसा भी कोह-ए-तूर के असरार तक चले
रम्ज़-ए-ख़ुदा की रम्ज़ भरी रौशनी मियाँ
मैं चाहता तो हूँ मिरे किरदार तक चले
कुछ रब्त हुस्न-ए-यार की ताज़ा-गरी से हो
आँखों से हो के सिलसिला इज़हार तक चले
कर्बल की ख़ाक से जो मिरी ख़ाक जा मिले
फिर ख़ाक मेरी मरकज़-ए-अनवार तक चले
यादों से बच निकलने का रस्ता नहीं मिला
मस्जिद से ले के हुस्न के बाज़ार तक चले
(554) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
साइम जी