आईना-दिल दाग़-ए-तमन्ना के लिए था

आईना-दिल दाग़-ए-तमन्ना के लिए था

सीने का सदफ़ इक दुर-ए-यकता के लिए था

जो तैरने वाले थे वो मंजधार से गुज़रे

दरिया का किनारा कफ़-ए-दरिया के लिए था

क्यूँ हाथ में तेरे मुझे पत्थर नज़र आया

दीवाना अगर था तो मैं दुनिया के लिए था

गुज़रा न तिरे बा'द कोई कूचा-ए-दिल से

ये रास्ता इक नक़्श-ए-कफ़-ए-पा के लिए था

दीवार से रुकता नहीं दीवार का साया

ज़ब्त-ए-ग़म-ए-माज़ी ग़म-ए-फ़र्दा के लिए था

कोई नहीं महफ़ूज़ यहाँ दस्त-ए-हवस से

यूसुफ़ का जो दामन था ज़ुलेख़ा के लिए था

बे-पर्दा चमकता है जो अब महफ़िल-ए-शब में

वो चाँद 'समद' कल यद-ए-बैज़ा के लिए था

(529) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554