काम आती नहीं अब कोई तदबीर हमारी

काम आती नहीं अब कोई तदबीर हमारी

हम से है ख़फ़ा साहिबो तक़दीर हमारी

आता ही नहीं बाज़ कभी कार-ए-ज़ियाँ से

पानी पे बनाता है वो तस्वीर हमारी

अब सर पे ठहरती नहीं दस्तार-ए-शुजाअत

ख़ुद अपना लहू पीती है शमशीर हमारी

हम ख़ाना-ख़राबी के असर से नहीं निकले

पूरी न हुई हसरत-ए-तामीर हमारी

अब रू-ब-रू आती ही नहीं सुब्ह-ए-मसर्रत

टलती ही नहीं है शब-ए-दिल-गीर हमारी

हर शख़्स हक़ारत से हमें देख रहा है

कोई भी बताता नहीं तक़्सीर हमारी

वो गोशा-ए-तन्हाई में पढ़ता है शब ओ रोज़

उस के वरक़ दिल पे है तहरीर हमारी

गुमराह न होने दिया साबित-क़दमी ने

शाइस्ता-ए-तहज़ीब है ज़ंजीर हमारी

हम वज्द में डूबे रहे और रेत की सूरत

मुट्ठी से सरकती रही जागीर हमारी

बे-ताब-ओ-तवाँ ज़ीनत-ए-दीवार है 'अख़्तर'

अब लर्ज़ा-बर-अंदाम है शमशीर हमारी

(978) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554