धूप की शिद्दत में नंगे पाँव नंगे सर निकल

धूप की शिद्दत में नंगे पाँव नंगे सर निकल

ऐ दिल-ए-सादा सवाद-ए-जब्र से बाहर निकल

कल का सूरज शाद-कामी की ख़बर दे या न दे

छोड़ अंदेशे हिसार-ए-ज़ात से बाहर निकल

मैं कई सदियों से गुम हूँ ख़्वाब के सकरात में

आफ़्ताब-ए-सुब्ह-ए-बेदारी मिरे सर पर निकल

साहिलों पर तेरे इस्तिक़बाल को आया है कौन

डूबने वाले उभर फिर सत्ह-ए-दरिया पर निकल

अहद-ए-दार-ओ-गीर है अपना तशख़्ख़ुस गुम न कर

सोच की सारी फ़सीलें तोड़ कर बाहर निकल

तीसरी दुनिया मुनव्वर हो मिरे अफ़्कार से

मेहर-ए-आज़ादी मिरे एहसास के अंदर निकल

अपने ख़द्द-ओ-ख़ाल देखूँ मैं भी ऐ 'सुल्तान-रश्क'

मेरी आँखों से मगर ऐ ख़्वाब के मंज़र निकल

(591) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554