समाचार Poetry (page 13)

किस किस को अब रोना होगा जाने क्या क्या भूल गया

शाज़ तमकनत

जाने क्या क़ीमत-ए-अरबाब-ए-वफ़ा ठहरेगी

शाज़ तमकनत

बड़े ख़ुलूस से दामन पसारता है कोई

शाज़ तमकनत

शिकोह-ए-ज़ात से दुश्मन का लश्कर काँप जाता है

शायान क़ुरैशी

राह-ए-वफ़ा में साया-ए-दीवार-ओ-दर भी है

शायान क़ुरैशी

आ कर नजात बख़्श दो रंज-ओ-मलाल से

शौक़ सालकी

वो ले के दिल को ये सोची कहीं जिगर भी है

शौक़ क़िदवाई

हुई या मुझ से नफ़रत या कुछ इस में किब्र-ओ-नाज़ आया

शौक़ क़िदवाई

रो रही है जिस तरह ये शम्अ परवाने के बाद

शौक़ देहलवी मक्की

ये ख़बर आई है आज इक मुर्शिद-ए-अकमल के पास

शौक़ बहराइची

शैख़ ओ बरहमन दोनों हैं बर-हक़ दोनों का हर काम मुनासिब

शौक़ बहराइची

राज़ में रक्खेंगे हम तेरी क़सम ऐ नासेह

शौक़ बहराइची

ईमान की लग़्ज़िश का इम्कान अरे तौबा

शौक़ बहराइची

अगर तुम जल भी जाते तो न होता ख़त्म अफ़्साना

शौकत परदेसी

कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ

शारिक़ कैफ़ी

कहीं दाम-ए-सब्ज़ा-ए-गुल मिला कहीं आरज़ू का चमन खिला

शारिक़ ईरायानी

क़ुदरत है तुर्फ़ा-कार तुझे कुछ ख़बर भी है

शारिक़ ईरायानी

तू समझता है तो ख़ुद तेरी नज़र गहरी नहीं

शरीफ़ कुंजाही

तीन शामों की एक शाम

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

बयान सफ़ाई

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

आख़िरी तमाशाई

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

चेहरे का आफ़्ताब दिखाई न दे तो फिर

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

ख़ुश-कुन ख़बर के धोके में रक्खा गया मुझे

शमशीर हैदर

मिरे ए'तिमाद को ग़म मिला मिरी जब किसी पे नज़र गई

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

बे-ख़बर फूल को भी खींच के पत्थर पे न मार

शमीम करहानी

ख़मोश किस लिए बैठे हो चश्म-ए-तर क्यूँ हो

शमीम करहानी

ग़म दो आलम का जो मिलता है तो ग़म होता है

शमीम करहानी

दर्द-शनास दिल नहीं जल्वा-तलब नज़र नहीं

शमीम करहानी

तिरे अहल-ए-दर्द के रोज़-ओ-शब इसी कश्मकश में गुज़र गए

शमीम जयपुरी

बा-वफ़ाई की अदा पाने लगा हूँ तुझ में

शमीम जयपुरी

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