फ़िरऔन-ए-वक़्त कोई भी हो सर-कशी करो
फ़िरऔन-ए-वक़्त कोई भी हो सर-कशी करो
यारान-ए-शहर मेरी तरह ज़िंदगी करो
अमृत नहीं नसीब तो ज़हराब ही सही
कुछ तो इलाज-ए-शिद्दत-ए-तिश्ना-लबी करो
ये ज़ुल्मत-ए-तमाम मुसलसल नहीं क़ुबूल
दिल का लहू बला से जले रौशनी करो
मुँह देखी दोस्ती से अब उकता गया है दिल
यारो करो ख़ुलूस से गो दुश्मनी करो
हम हर-नफ़स खिलाएँगे अपने लहू से फूल
तुम एहतिमाम-ए-दार-ओ-रसन हर घड़ी करो
हर शे'र आबगीना है मौज-ए-ख़याल का
लो काम एहतियात से जब शाइ'री करो
कलियाँ खिलाने आएगा झोंका नसीम का
तुम राह में हज़ार फ़सीलें खड़ी करो
(1160) Peoples Rate This
Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554
अजमल अजमली