दूर तक परछाइयाँ सी हैं रह-ए-अफ़्कार पर

दूर तक परछाइयाँ सी हैं रह-ए-अफ़्कार पर

रेंगती फिरती है चुप दिल के दर-ओ-दीवार पर

तू कि है बैठा ख़स-ए-औहाम के अम्बार पर

इस तरह मत हँस मिरे शो'ला-ब-कफ़ अशआ'र पर

ऐ निज़ाम-ए-वहशत-अफ़ज़ा तेरे सन्नाटों की ख़ैर

इक किरन हँसने लगी है रात की तलवार पर

किरचनें दिल की घनी पलकों पे हैं बिखरी हुई

आइना टूटा पड़ा है साया-ए-असरार पर

शे'र कहने की ग़रज़ से मैं ने अक्सर रात-भर

फूल से एहसास को रक्खा है नोक-ए-ख़ार पर

क्या यही मंज़िल थी दिल की क्या उसी के वास्ते

गामज़न बरसों रहा ग़म की रह-ए-दुश्वार पर

ख़ूँ की बू आती है पैहम सूरत-ए-हालात से

आँख रोती है लहू हर सुर्ख़ी-ए-अख़बार पर

किस हिमाक़त के एवज़ किस जुर्म की पादाश में

वक़्त ने खींचा है मुझ को ज़िंदगी की दार पर

एक मुद्दत से दिल-ओ-जाँ ने लगा रक्खे हैं कान

अन-सुनी सरगोशियों की रस-भरी झंकार पर

(785) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554