सपना Poetry (page 28)

हाशिए पर कुछ हक़ीक़त कुछ फ़साना ख़्वाब का

शाहिद माहुली

हर मरहले से यूँ तो गुज़र जाएगी ये शाम

शाहिद माहुली

ज़मीं तश्कील दे लेते फ़लक ता'मीर कर लेते

शाहिद लतीफ़

ये जो रब्त रू-ब-ज़वाल है ये सवाल है

शाहिद लतीफ़

फिर आज दर्द से रौशन हुआ है सीना-ए-ख़्वाब

शाहिद कमाल

नन्हा सा दिया है कि तह-ए-आब है रौशन

शाहिद कमाल

ख़ुद मुझ को मेरे दस्त-ए-कमाँ-गीर से मिला

शाहिद कमाल

ख़ुद मुझ को मेरे दस्त-ए-कमाँ-गीर से मिला

शाहिद कमाल

जो मिरी पुश्त में पैवस्त है उस तीर को देख

शाहिद कमाल

जो इस ज़मीन पे रहते थे आसमान से लोग

शाहिद कमाल

हवा की डोर में टूटे हुए तारे पिरोती है

शाहिद कमाल

धूप के ज़र्द जज़ीरों में नुमू ज़िंदा है

शाहिद कमाल

अब्र लिखती है कहीं और घटा लिखती है

शाहिद कमाल

तिरी थकी हुई आँखों में ख़्वाब था कि नहीं

शाहिद कलीम

मिरी नज़र कि तरह दिल परिंद ओझल है

शाहिद जमील

कैसे तोड़ी गई ये हद्द-ए-अदब पूछते हैं

शाहिद जमाल

लज़्ज़त-ए-संग न पूछो लोगो उम्र अगर हाथ आए फिर

शाहिद इश्क़ी

तेरे सिवा

शाहिद अख़्तर

आस

शाहिद अख़्तर

महका है गुल-ए-ख़ून-ए-वफ़ा जानिए क्या हो

शाहिद अख़्तर

चाँद माँगा न कभी हम ने सितारे माँगे

शाहिद अख़्तर

यूँ देखने को देखते रहते हैं ख़्वाब लोग

शाहिद अहमद शोएब

ये हम कौन हैं

शाहीन मुफ़्ती

मिसाल-ए-संग-ए-तपीदा जड़े हुए हैं कहीं

शाहीन मुफ़्ती

नक़दी कहाँ से आएगी

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

कसीला ज़ाइक़ा

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

आख़िरी क़ाफ़िला

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

शहर-ए-ख़ूबाँ से जो हम अब भी गुज़र आते हैं

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

पलकों से अपने भूले हुए ख़्वाब बाँध लें

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

गर्म-जोशी के नगर में सर्द-तन्हाई मिली

शाहीन बद्र

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