दोष Poetry (page 4)

जिस दिन से कोई ख़्वाहिश-ए-दुनिया नहीं रखता

फ़राग़ रोहवी

देखा जो आईना तो मुझे सोचना पड़ा

फ़राग़ रोहवी

या रब मिरी हयात से ग़म का असर न जाए

फ़ना निज़ामी कानपुरी

बाकिरा

फ़हमीदा रियाज़

मैं उस के ऐब उस को बताता भी किस तरह

एजाज़ वारसी

यूँ उस पे मिरी अर्ज़-ए-तमन्ना का असर था

एहसान दानिश

शायर-ए-आज़म

दिलावर फ़िगार

फ़रिश्ता है तो तक़द्दुस तुझे मुबारक हो

दिल अय्यूबी

अदा-ए-हैरत-ए-आईना-गर भी रखते हैं

दिल अय्यूबी

सुनहरी मछली

दीप्ति मिश्रा

ज़ीस्त बे-वादा-ए-अनवार-ए-सहर है कि जो थी

द्वारका दास शोला

जग है मुश्ताक़ पिव के दर्शन का

दाऊद औरंगाबादी

उस के दर तक किसे रसाई है

दाग़ देहलवी

ज़ौ-बार इसी सम्त हुए शम्स-ओ-क़मर भी

ब्रहमा नन्द जलीस

इश्क़ का रोग तो विर्से में मिला था मुझ को

भारत भूषण पन्त

पछताओगे फिर हम से शरारत नहीं अच्छी

बेख़ुद देहलवी

शादी ओ अलम सब से हासिल है सुबुकदोशी

बेदम शाह वारसी

कोई समझाईयो यारो मिरा महबूब जाता है

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

हमारे ऐब ने बे-ऐब कर दिया हम को

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

मिसाल-ए-तार-ए-नज़र क्या नज़र नहीं आता

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

दोस्त हर ऐब छुपा लेते हैं

बाक़ी सिद्दीक़ी

वक़्त रस्ते में खड़ा है कि नहीं

बाक़ी सिद्दीक़ी

थे हम इस्तादा तिरे दर पे वले बैठ गए

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब ओ हुनर

ज़फ़र

नहीं इश्क़ में इस का तो रंज हमें कि क़रार ओ शकेब ज़रा न रहा

ज़फ़र

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

किसी के ऐब छुपाना सवाब है लेकिन

अज़हर इनायती

उजाला दश्त-ए-जुनूँ में बढ़ाना पड़ता है

अज़हर इनायती

इस रास्ते में जब कोई साया न पाएगा

अज़हर इनायती

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