चाहत Poetry (page 5)

इक दिखावा रह गया बस दिल से वो चाहत गई

बिलाल अहमद

मैं ने सोचा था मुझे मिस्मार कर सकता नहीं

भारत भूषण पन्त

इश्क़-विश्क़ ये चाहत-वाहत मन का भुलावा फिर मन भी अपना क्या

बेकल उत्साही

भीतर बसने वाला ख़ुद बाहर की सैर करे मौला ख़ैर करे

बेकल उत्साही

प्यार की नई दस्तक दिल पे फिर सुनाई दी

बशीर बद्र

ख़ानदानी रिश्तों में अक्सर रक़ाबत है बहुत

बशीर बद्र

भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा

बशीर बद्र

ज़ुल्फ़ जो रुख़ पर तिरे ऐ मेहर-ए-तलअत खुल गई

ज़फ़र

शमशीर-ए-बरहना माँग ग़ज़ब बालों की महक फिर वैसी ही

ज़फ़र

तुम्हारे दिल में जो ग़म बसा है तो मैं कहाँ हूँ

बद्र वास्ती

इक़रार किसी दिन है तो इंकार किसी दिन

बद्र वास्ती

वही जिंस-ए-वफ़ा आख़िर फ़राहम होती जाती है

बीएस जैन जौहर

एक नज़्म

अज़रा अब्बास

प्यारा प्यारा घर अपना

अज़मतुल्लाह ख़ाँ

शब की आग़ोश में महताब उतारा उस ने

अज़्म शाकरी

दिल ने खुलने की राह ले ली है

आयुष चराग़

फिर सदा-ए-मोहब्बत सुनी है अभी

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

मिरी मुश्किल अगर आसाँ बना देते तो अच्छा था

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

चमचे की दुआ

असरार जामई

परदेसी का ख़त

असरा रिज़वी

दयार-ए-हिज्र में ख़ुद को तो अक्सर भूल जाता हूँ

असलम कोलसरी

उम्र सारी तिरी चाहत में बितानी पड़ जाए

अासिफ़ शफ़ी

कोई हमदम बना के देखो तुम

असर अकबराबादी

ज़मीं की कोख से पहले शजर निकालता है

अरशद महमूद अरशद

सुख़न के चाक में पिन्हाँ तुम्हारी चाहत है

अरशद अब्दुल हमीद

सुख़न के चाक में पिन्हाँ तुम्हारी चाहत है

अरशद अब्दुल हमीद

मुझ को तक़दीर ने यूँ बे-सर-ओ-आसार किया

अरशद अब्दुल हमीद

वक़्त का झोंका जो सब पत्ते उड़ा कर ले गया

अर्श सिद्दीक़ी

हिना-रंग हाथों में

अरमान नज्मी

जब भी दुश्मन बन के इस ने वार किया

आरिफ़ शफ़ीक़

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