दम Poetry (page 12)

दस्त-ए-अदू से शब जो वो साग़र लिया किए

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

रक़ाबतों की तरह से हम ने मोहब्बतें बे-मिसाल की हैं

शीश मोहम्मद इस्माईल आज़मी

अजनबी

शाज़ तमकनत

जाने वाले तुझे कब देख सकूँ बार-ए-दिगर

शाज़ तमकनत

छोड़ दूँ शहर तिरा छोड़ दूँ दुनिया तेरी

शाज़ तमकनत

लब चुप हैं तो क्या दिल गिला-पर्दाज़ नहीं है

शौक़ क़िदवाई

हुई या मुझ से नफ़रत या कुछ इस में किब्र-ओ-नाज़ आया

शौक़ क़िदवाई

दिल खोटा है हम को उस से राज़-ए-इश्क़ न कहना था

शौक़ क़िदवाई

वो सनम ख़ूगर-ए-वफ़ा न हुआ

शौक़ देहलवी मक्की

ये ख़बर आई है आज इक मुर्शिद-ए-अकमल के पास

शौक़ बहराइची

राज़ में रक्खेंगे हम तेरी क़सम ऐ नासेह

शौक़ बहराइची

न जब देखी गई मेरी तड़प मेरी परेशानी

शौक़ बहराइची

न दे साक़ी मुझे कुछ ग़म नहीं है

शौक़ बहराइची

हो कैसे किसी वादे का इक़रार रजिस्टर्ड

शौक़ बहराइची

अक़्ल की कुछ कम नहीं है रहबरी मेरे लिए

शौक़ बहराइची

ऐ हम-सफ़ीर तलख़ी-ए-तर्ज़-ए-बयाँ न छोड़

शौक़ बहराइची

औरत

शौकत परदेसी

ज़िंदगी का सफ़र ख़त्म होता रहा तुम मुझे दम-ब-दम याद आते रहे

शौकत परदेसी

मिरे लिए मिरी पर्वाज़ के लिए कम है

शौकत मेहदी

जन्नत से दूर

शारिक़ कैफ़ी

सूना आँगन नींद में ऐसे चौंक उठा है

शारिक़ कैफ़ी

पर्दा-ए-रुख़ क्या उठा हर-सू उजाले हो गए

शारिब मौरान्वी

शीशा-ए-साअत का ग़ुबार

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

सुर्ख़ सीधा सख़्त नीला दूर ऊँचा आसमाँ

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

जो चाहते हो कि मंज़िल तुम्हारी जादा हो

शम्स तबरेज़ी

ये घर जो हमारे लिए अब दश्त-ए-जुनूँ है

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

कमरे की दीवारों पर आवेज़ां जो तस्वीरें हैं

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

हम-मर्तबा न समझो रुत्बा मिरा तो जानो

शमीम क़ासमी

रौशनी तेज़ करो

शमीम करहानी

न पूछ कब से ये दम घुट रहा है सीने में

शमीम जयपुरी

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