धूल Poetry (page 63)

किसी परिंदे की वापसी का सफ़र मिरी ख़ाक में मिलेगा

अहमद ज़फ़र

साग़र क्यूँ ख़ाली है मिरा ऐ साक़ी तिरे मयख़ाने में

अहमद शाहिद ख़ाँ

जिस जगह आगही मुक़य्यद है

अहमद सज्जाद बाबर

उड़ती है ख़ाक दिल के दरीचों के आस-पास

अहमद रिज़वान

मैं ख़ाक हो रहा हूँ यहाँ ख़ाक-दान में

अहमद रिज़वान

एक उम्र होती है

अहमद राही

दिल के सुनसान जज़ीरों की ख़बर लाएगा

अहमद राही

तर्क-ए-दरयूज़ा

अहमद नदीम क़ासमी

दुआ

अहमद नदीम क़ासमी

उम्र भर उस ने इसी तरह लुभाया है मुझे

अहमद नदीम क़ासमी

जब भी आँखों में तिरी रुख़्सत का मंज़र आ गया

अहमद नदीम क़ासमी

शाम होती है तो याद आती है सारी बातें

अहमद मुश्ताक़

बिछड़ के ख़ाक हुए हम तो क्या ज़रा देखो

अहमद महफ़ूज़

ये जो धुआँ धुआँ सा है दश्त-ए-गुमाँ के आस-पास

अहमद महफ़ूज़

उधर से आए तो फिर लौट कर नहीं गए हम

अहमद महफ़ूज़

सर-ब-सर पैकर-ए-इज़हार में लाता है मुझे

अहमद महफ़ूज़

रक़्स-ए-शरर क्या अब के वहशत-नाक हुआ

अहमद महफ़ूज़

फेंकते संग-ए-सदा दरिया-ए-वीरानी में हम

अहमद महफ़ूज़

बदन-सराब न दरिया-ए-जाँ से मिलता है

अहमद महफ़ूज़

कोई हैरत है न इस बात का रोना है हमें

अहमद ख़याल

ये तअल्लुक़ तिरी पहचान बना सकता था

अहमद ख़याल

उन को में कर्बला के महीने में लाऊँगा

अहमद ख़याल

मैं वहशत-ओ-जुनूँ में तमाशा नहीं बना

अहमद ख़याल

कोई हैरत है न इस बात का रोना है हमें

अहमद ख़याल

जुनूँ को रख़्त किया ख़ाक को लिबादा किया

अहमद ख़याल

ऐ तअ'स्सुब ज़दा दुनिया तिरे किरदार पे ख़ाक

अहमद ख़याल

दाना-ए-गंदुम-ए-बेदार उठाने लगा हूँ

अहमद कामरान

मैं रंग-ए-आसमाँ कर के सुनहरी छोड़ देता हूँ

अहमद कमाल परवाज़ी

दिल-ए-बेताब के हमराह सफ़र में रहना

अहमद जावेद

अच्छी गुज़र रही है दिल-ए-ख़ुद-कफ़ील से

अहमद जावेद

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