सपना Poetry (page 37)

थोड़ी देर ऐ साक़ी बज़्म में उजाला है

सलाम मछली शहरी

कार्तिक

सलाहुद्दीन परवेज़

बहुत ख़्वाब-ए-ग़फ़लत में दिन चढ़ गया

सख़ी लख़नवी

दुल्हन भी अगर बन के आएगी रात

सख़ी लख़नवी

चश्म-ए-मय-गूँ वहाँ शराब लज़ीज़

सख़ी लख़नवी

रात

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दीवार क़हक़हा

सज्जाद बाक़र रिज़वी

उसे मैं तलाश कहाँ करूँ वो उरूज है मैं ज़वाल हूँ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

सोए हुओं में ख़्वाब से बेदार कौन है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

मैं हम-नफ़साँ जिस्म हूँ वो जाँ की तरह था

सज्जाद बाक़र रिज़वी

मैं हम-नफ़साँ जिस्म हूँ वो जाँ की तरह था

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हमें चार सम्त की दौड़ में वही गर्द-ए-बाद-ए-सदा मिला

सज्जाद बाक़र रिज़वी

ज़मज़मा इज़्तिराब कुछ भी न था

सज्जाद बलूच

ये सराबों की शरारत भी न हो तो क्या हो

सज्जाद बलूच

तुम ग़लत समझे हमें और परेशानी है

सज्जाद बलूच

तुम ग़लत समझे हमें और परेशानी है

सज्जाद बलूच

तुझे खो कर मोहब्बत को ज़ियादा कर लिया मैं ने

सज्जाद बलूच

तुझे खो कर मोहब्बत को ज़ियादा कर लिया मैं ने

सज्जाद बलूच

सुर्ख़ मकाँ ढलता जाता है इक बर्फ़ीली मिट्टी में

सज्जाद बलूच

शब की ज़ुल्फ़ें सँवारता हुआ मैं

सज्जाद बलूच

रहीन-ए-ख़्वाब हूँ और ख़्वाब के मकाँ में हूँ

सज्जाद बलूच

रहीन-ए-ख़्वाब हूँ और ख़्वाब के मकाँ में हूँ

सज्जाद बलूच

लहर उस आँख में लहराई जो बे-ज़ारी की

सज्जाद बलूच

लहर इस आँख में लहराई जो बे-ज़ारी की

सज्जाद बलूच

कहाँ ज़मीं के ज़ईफ़ ज़ीने पे चल रही है

सज्जाद बलूच

हमें तो कल किसी अगले नगर पहुँचना है

सज्जाद बलूच

दिखाई देंगी सभी मुम्किनात काग़ज़ पर

सज्जाद बलूच

मी-यौमिल-हिसाब

साजिदा ज़ैदी

आप इज़्ज़त-मआब सच-मुच के

साजिद प्रेमी

मैं चाहता हूँ कि हर शय यहाँ सँवर जाए

साजिद हमीद

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