भाग्य Poetry (page 3)

हम कभी ख़ुद से कोई बात नहीं कर पाते

उषा भदोरिया

हो तिरा इश्क़ मिरी ज़ात का मेहवर जैसे

उरूज ज़ेहरा ज़ैदी

जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया

उम्मीद फ़ाज़ली

दिल ने फिर चाहा उजाले का समुंदर होना

तुफ़ैल चतुर्वेदी

वो आई शाम-ए-ग़म वक़्फ़-ए-बला होने का वक़्त आया

तिलोकचंद महरूम

काश इक शब के लिए ख़ुद को मयस्सर हो जाएँ

तौसीफ़ तबस्सुम

जौन-एलिया से आख़री मुलाक़ात

तारिक़ क़मर

मैं ने जब जब भी तिरा नाम लिखा काग़ज़ पर

तनवीर गौहर

शहर के दीवार-ओ-दर पर रुत की ज़र्दी छाई थी

ताज सईद

मोती नहीं हूँ रेत का ज़र्रा तो मैं भी हूँ

तैमूर हसन

तो तय हुआ ना कि जब भी लिखना रुतों के सारे अज़ाब लिखना

ताहिर तोनस्वी

शौक़ का तक़ाज़ा है शरह-ए-आरज़ू कीजे

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

साहब की बिपता

सय्यद ज़मीर जाफ़री

बढ़ा तन्हाई में एहसास-ए-ग़म आहिस्ता आहिस्ता

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

ग़म-हा-ए-रोज़गार से फ़ुर्सत नहीं मुझे

सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़

यादश-ब-ख़ैर साया-फ़गन घर ही और था

सय्यद मज़हर जमील

इस क़दर ग़ौर से देखा है सरापा उस का

सय्यद काशिफ़ रज़ा

कमर बाँधो मुक़द्दर के सहारे बैठने वालो

सय्यद बासित हुसैन माहिर लखनवी

तीर पे तीर निशानों पे निशाने बदले

सय्यद आरिफ़ अली

पहले से देखना कहीं बेहतर बनाएँगे

सय्यद अमीनुल हसन मोहानी बिस्मिल

जो डर अपनों से है ग़ैरों से वो डर हो नहीं सकता

सय्यद अमीन अशरफ़

ख़्वाब देखता हूँ

सुरूर बाराबंकवी

जो नज़र आता नहीं दीवार में दर और है

सुलतान रशक

दश्त में घास का मंज़र भी मुझे चाहिए है

सुलेमान ख़ुमार

बरसों हुए उस से न कोई बात हुई रात

सुहैल काकोरवी

ये आज आए हैं किस अजनबी से देस में हम

सूफ़ी तबस्सुम

ग़म-नसीबों को किसी ने तो पुकारा होगा

सूफ़ी तबस्सुम

आरज़ूओं को अना-गीर नहीं कर सकते

सिया सचदेव

ये इंक़लाब भी ऐ दौर-ए-आसमाँ हो जाए

सिराज लखनवी

क़िस्मत से लड़ती हैं निगाहें

सिराज लखनवी

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