नाम Poetry (page 84)

क़यामत राग ज़ालिम भाव काफ़िर गत है ऐ पन्ना

आबरू शाह मुबारक

कमाँ हुआ है क़द अबरू के गोशा-गीरों का

आबरू शाह मुबारक

इस ज़ुल्फ़-ए-जाँ-गुज़ा कूँ सनम की बला कहो

आबरू शाह मुबारक

इंसान है तो किब्र सीं कहता है क्यूँ अना

आबरू शाह मुबारक

हुस्न पर है ख़ूब-रूयाँ में वफ़ा की ख़ू नहीं

आबरू शाह मुबारक

आया है सुब्ह नींद सूँ उठ रसमसा हुआ

आबरू शाह मुबारक

नुमायाँ जब वो अपने ज़ेहन की तस्वीर करता है

अबरार किरतपुरी

भड़क उठा है अलाव तुम्हारी फ़ुर्क़त का

अबरार हामिद

तिरी दुनिया के नक़्शे में

अबरार अहमद

पस-मंज़र की आवाज़

अबरार अहमद

मिट्टी थी किस जगह की

अबरार अहमद

हवा जब तेज़ चलती है

अबरार अहमद

दवाम-ए-वस्ल का ख़्वाब

अबरार अहमद

कहीं पर सुब्ह रखता हूँ कहीं पर शाम रखता हूँ

अबरार अहमद

मगर ये तीरगी जाने का नाम लेती नहीं

आबिद वदूद

न घर सुकून-कदा है न कारख़ाना-ए-इश्क़

आबिद वदूद

आप करिश्मा-साज़ हुए हैं होश में है दीवाना भी

आबिद नामी

जिन्हें था फ़ख़्र नवाब-ओ-नजीब होते हैं

आबिद काज़मी

सुर्ख़ सहर से है तो बस इतना सा गिला हम लोगों का

अभिषेक शुक्ला

जफ़ा के ज़िक्र पे वो बद-हवास कैसा है

अब्दुस्समद ’तपिश’

अगर वो बे-अदब है बे-अदब लिख

अब्दुस्समद ’तपिश’

कुछ न किया अरबाब-ए-जुनूँ ने फिर भी इतना काम किया

अब्दुर रऊफ़ उरूज

आज यादों ने अजब रंग बिखेरे दिल में

अब्दुर रऊफ़ उरूज

वो शख़्स जिस ने ख़ुद अपना लहू पिया होगा

अब्दुर्रहीम नश्तर

क्या कीजिए रक़म सनद-ए-एहतिशाम-ए-ज़ुल्फ़

अब्दुल्ल्ला ख़ाँ महर लखनवी

का'बा है कभी तो कभी बुत-ख़ाना बना है

अब्दुल्लतीफ़ शौक़

वो शख़्स क्या है मिरे वास्ते सुनाएँ उसे

अब्दुल्लाह कमाल

बड़ा मुख़्लिस हूँ पाबंद-ए-वफ़ा हूँ

अब्दुल्लाह कमाल

मैं जानता हूँ कौन हूँ मैं और क्या हूँ मैं

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

पूछी न ख़बर कभी हमारी

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

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