पहलू Poetry (page 16)

न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का

अमीर मीनाई

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी

अमीर मीनाई

दिल जुदा माल जुदा जान जुदा लेते हैं

अमीर मीनाई

जंगल: एक हश्त पहलू तस्वीर

अमीक़ हनफ़ी

जंगल

अमीक़ हनफ़ी

बम्बई रात समुंदर

अमीक़ हनफ़ी

सावन आया छाने लगे घोर घन घोर बादल

अमीक़ हनफ़ी

सूखी टहनी पर हरियल

अम्बर बहराईची

धनक

अम्बर बहराईची

रंज और रंज भी तन्हाई का

अल्ताफ़ हुसैन हाली

धूम थी अपनी पारसाई की

अल्ताफ़ हुसैन हाली

सवालों में ख़ुद भी है डूबी उदासी

आलोक मिश्रा

तेरे पहलू में जी रही थी कभी

अलमास शबी

वालिदा मरहूमा की याद में

अल्लामा इक़बाल

शिकवा

अल्लामा इक़बाल

तीन शराबी

अली सरदार जाफ़री

बम्बई

अली सरदार जाफ़री

लग़्ज़िश-ए-गाम लिए लग़्ज़िश-ए-मस्ताना लिए

अली सरदार जाफ़री

शहर-ए-दिल कुंज-ए-बयाबान नहीं था पहले

अली मुज़म्मिल

मेहमान-दारी

अली मंज़ूर हैदराबादी

मुझे तो इंतिज़ार-ए-इश्क़ में ही लुत्फ़ आता है

अलीना इतरत

वो कि हर अहद-ए-मोहब्बत से मुकरता जाए

आलमताब तिश्ना

सिवाए-दर-ब-दरी उस को ख़ाक मिलता है

आलमताब तिश्ना

ऐ इश्क़ कहीं ले चल

अख़्तर शीरानी

आँसू

अख़्तर शीरानी

यूँ तो किस फूल से रंगत न गई बू न गई

अख़्तर शीरानी

यक़ीन-ए-वादा नहीं ताब-ए-इंतिज़ार नहीं

अख़्तर शीरानी

न वो ख़िज़ाँ रही बाक़ी न वो बहार रही

अख़्तर शीरानी

मिरी आँखों से ज़ाहिर ख़ूँ-फ़िशानी अब भी होती है

अख़्तर शीरानी

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