फूल Poetry (page 50)

लहू तेज़ाब करना चाहता है

अकरम नक़्क़ाश

चढ़े हुए हैं जो दरिया उतर भी जाएँगे

अकरम महमूद

आँखों में ख़्वाब ताज़ा है दिल में नया ख़याल भी

अकरम महमूद

हिज्र की शाम से ज़ख़्मों के दोशाले माँगूँ

अकमल इमाम

उरूस-उल-बिलाद

अख़्तर-उल-ईमान

सिलसिले

अख़्तर-उल-ईमान

काले सफ़ेद परों वाला परिंदा और मेरी एक शाम

अख़्तर-उल-ईमान

बाज़-आमद --- एक मुन्ताज

अख़्तर-उल-ईमान

आख़िरी मुलाक़ात

अख़्तर-उल-ईमान

ऐ दुनिया तेरे रस्ते से हट जाएँगे

अख्तर शुमार

जहाँ 'रेहाना' रहती थी

अख़्तर शीरानी

एक शाएरा की शादी पर

अख़्तर शीरानी

यूँ तो किस फूल से रंगत न गई बू न गई

अख़्तर शीरानी

यारो कू-ए-यार की बातें करें

अख़्तर शीरानी

वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए

अख़्तर शीरानी

निकहत-ए-ज़ुल्फ़ से नींदों को बसा दे आ कर

अख़्तर शीरानी

न वो ख़िज़ाँ रही बाक़ी न वो बहार रही

अख़्तर शीरानी

न भूल कर भी तमन्ना-ए-रंग-ओ-बू करते

अख़्तर शीरानी

मैं आरज़ू-ए-जाँ लिखूँ या जान-ए-आरज़ू!

अख़्तर शीरानी

ला पिला साक़ी शराब-ए-अर्ग़वानी फिर कहाँ

अख़्तर शीरानी

झूम कर बदली उठी और छा गई

अख़्तर शीरानी

बजा कि है पास-ए-हश्र हम को करेंगे पास-ए-शबाब पहले

अख़्तर शीरानी

बहें न आँख से आँसू तो नग़्मगी बे-सूद

अख़्तर सईद ख़ान

ये हम से पूछते हो रंज-ए-इम्तिहाँ क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

मआल-ए-गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार कुछ भी नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

वो हुस्न-ए-सब्ज़ जो उतरा नहीं है डाली पर

अख़्तर रज़ा सलीमी

तुम्हारे होने का शायद सुराग़ पाने लगे

अख़्तर रज़ा सलीमी

अंदेशे मुझे निगल रहे हैं

अख़्तर रज़ा सलीमी

कब लोगों ने अल्फ़ाज़ के पत्थर नहीं फेंके

अख़्तर नज़्मी

हर शाख़-ए-चमन है अफ़्सुर्दा हर फूल का चेहरा पज़मुर्दा

अख़तर मुस्लिमी

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