रहस्य Poetry (page 8)

सुख़न राज़-ए-नशात-ओ-ग़म का पर्दा हो ही जाता है

शाज़ तमकनत

शब-ए-वा'दा कह गई है शब-ए-ग़म दराज़ रखना

शाज़ तमकनत

शब ओ रोज़ जैसे ठहर गए कोई नाज़ है न नियाज़ है

शाज़ तमकनत

ख़ुद अपना हाल दिल-ए-मुब्तला से कुछ न कहा

शाज़ तमकनत

सब्र-ओ-क़रार टूट गया इज़्तिराब से

शायान क़ुरैशी

लब चुप हैं तो क्या दिल गिला-पर्दाज़ नहीं है

शौक़ क़िदवाई

हुई या मुझ से नफ़रत या कुछ इस में किब्र-ओ-नाज़ आया

शौक़ क़िदवाई

फ़रियाद और तुझ को सितमगर कहे बग़ैर

शौक़ क़िदवाई

दिल खोटा है हम को उस से राज़-ए-इश्क़ न कहना था

शौक़ क़िदवाई

आटा

शौकत थानवी

औरत

शौकत परदेसी

दिलों पर नक़्श होना चाहता हूँ

शारिक़ कैफ़ी

लग़्ज़िश पा-ए-होश का हर्फ़-ए-जवाज़ ले के हम

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

आब ओ गिया से बे-नियाज़ सर्द जबीन-ए-कोह पर

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

कुछ इस तरह वो निगाहें चुराए जाते हैं

शम्स ज़ुबैरी

वजूद-ए-बर्क़ ज़रूरी है गुलिस्ताँ के लिए

शम्स इटावी

न कोई अपना ग़म है और न अब कोई ख़ुशी अपनी

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

मंज़िल-ए-इश्क़ के राहबर खो गए

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

नीले पीले सियाह सुर्ख़ सफ़ेद सब थे शामिल इसी तमाशे में

शमीम हनफ़ी

जबकि दुश्मन हो राज़ दाँ अपना

शाकिर कलकत्तवी

खुल गया उन की आरज़ू में ये राज़

शकील बदायुनी

ज़लज़ला

शकील बदायुनी

उन की तस्वीर देख कर

शकील बदायुनी

मुझे भूल जा

शकील बदायुनी

कहाँ है आ जा

शकील बदायुनी

उन से उम्मीद-ए-रू-नुमाई है

शकील बदायुनी

उन को शरह-ए-ग़म सुनाई जाएगी

शकील बदायुनी

सरगुज़िश्त-ए-दिल को रूदाद-ए-जहाँ समझा था मैं

शकील बदायुनी

सर भी है पा-ए-यार भी शौक़-ए-सिवा को क्या हुआ

शकील बदायुनी

नुमायाँ दोनों जानिब शान-ए-फ़ितरत होती जाती है

शकील बदायुनी

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