रंग Poetry (page 63)

दर-ए-उमीद के दरयूज़ा-गर

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बुनियाद कुछ तो हो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अगस्त-1952

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम आए हो न शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुझे पुकारा है बे-इरादा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तिरी उमीद तिरा इंतिज़ार जब से है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तेरी सूरत जो दिल-नशीं की है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शाख़ पर ख़ून-ए-गुल रवाँ है वही

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फिर लौटा है ख़ुर्शीद-ए-जहाँ-ताब सफ़र से

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जमेगी कैसे बिसात-ए-याराँ कि शीशा ओ जाम बुझ गए हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जैसे हम-बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हैराँ है जबीं आज किधर सज्दा रवा है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़िक्र-ए-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूँ या न करूँ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सोच

फ़हमीदा रियाज़

कब तक

फ़हमीदा रियाज़

जाप

फ़हमीदा रियाज़

एक रात की कहानी

फ़हमीदा रियाज़

बैठा है मेरे सामने वो

फ़हमीदा रियाज़

ज़िंदगी से मुकालिमा

फ़हीम शनास काज़मी

राहदारी में गूँजती नज़्म

फ़हीम शनास काज़मी

क़िस्सा तमाम

फ़हीम शनास काज़मी

हमारे शजरे बिखर गए हैं

फ़हीम शनास काज़मी

देर हो गई

फ़हीम शनास काज़मी

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