मामला Poetry (page 18)

क़ुर्बतें न बन पाए फ़ासले सिमट कर भी

सरवर अरमान

इन आँखों में कई सपने कई अरमान थे लेकिन

सरवर अरमान

महबूबा के लिए आख़िरी नज़्म

सरमद सहबाई

किस शख़्स की तलाश में सर फोड़ती रही

सरमद सहबाई

दश्त में है एक नक़्श-ए-रहगुज़र सब से अलग

सरमद सहबाई

ऐसी वैसी पे क़नाअ'त नहीं कर सकते हम

सरफ़राज़ ज़ाहिद

ऐसी वैसी पे क़नाअत नहीं कर सकते हम

सरफ़राज़ ज़ाहिद

आइने में कहीं गुम हो गई सूरत मेरी

सरफ़राज़ ख़ालिद

अपनी सूरत को बदलना ही नहीं चाहता मैं

सरफ़राज़ ख़ालिद

शहर भर के आईनों पर ख़ाक डाली जाएगी

सरफ़राज़ दानिश

शहर भर के आईनों पर ख़ाक डाली जाएगी

सरफ़राज़ दानिश

इस से पहले कि सर उतर जाएँ

सरफ़राज़ दानिश

आँखों में अगर आप की सूरत नहीं होती

सरफ़राज़ अबद

शादी के जो अफ़्साने हैं रंगीन बहुत हैं

सरफ़राज़ शाहिद

टूट के पत्थर गिरते रहते हैं दिन रात चटानों से

सरफ़राज़ आमिर

अजब हैं सूरत-ए-हालात अब के

सरदार सलीम

मैं वो आतिश-ए-नफ़स हूँ आग अभी

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

कोई उस से नहीं कहता कि ये क्या बेवफ़ाई है

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

ब-जुज़ साया तन-ए-लाग़र को मेरे कोई क्या समझे

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

सितमगर तुझ से हम कब शिकवा-ए-बेदाद करते हैं

सरस्वती सरन कैफ़

यूँ अकेला दश्त-ए-ग़ुर्बत में दिल-ए-नाकाम था

साक़िब लखनवी

मैं नहीं कहता कि दुनिया को बदल कर राह चल

साक़िब लखनवी

अलकुबड़े

साक़ी फ़ारुक़ी

रेत की सूरत जाँ प्यासी थी आँख हमारी नम न हुई

साक़ी फ़ारुक़ी

कब इस से क़ब्ल नज़र में गुल-ए-मलाल खिला

समीना राजा

वो पल

सलमान अंसारी

तआ'क़ुब मेरा ख़ुशबू कर रही थी

सलमा शाहीन

ख़ाक-बस्ता हैं तह-ए-ख़ाक से बाहर न हुए

सलीम शुजाअ अंसारी

इक नए शहर-ए-ख़ुश-ए-आसार की बीमारी है

सालिम सलीम

बड़ी ही अँधेरी डगर है मियाँ

सलीम शीराज़ी

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