तस्वीर Poetry (page 20)

आह से या आह की तासीर से

फ़ानी बदायुनी

साक़िया तू ने मिरे ज़र्फ़ को समझा क्या है

फ़ना निज़ामी कानपुरी

हर घड़ी पेश-ए-नज़र इश्क़ में क्या क्या न रहा

फ़ना बुलंदशहरी

है वज्ह कोई ख़ास मिरी आँख जो नम है

फ़ना बुलंदशहरी

अब तसव्वुर में हरम है न सनम-ख़ाना है

फ़ना बुलंदशहरी

ये जो लाहौर से मोहब्बत है

फख़्र अब्बास

बिजली सी इक और गिरा दी ज़ालिम ने

फख़्र अब्बास

ग़म-ब-दिल शुक्र-ब-लब मस्त ओ ग़ज़ल-ख़्वाँ चलिए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मिटा के तीरगी तनवीर चाहता है दिल

फ़ैय्याज़ रश्क़

नज़्र-ए-फ़िराक़

फ़हमीदा रियाज़

चार-सू है बड़ी वहशत का समाँ

फ़हमीदा रियाज़

अली-बाबा कोई सिम-सिम

फ़हीम शनास काज़मी

समझ रहा था मैं ये दिन गुज़रने वाला नहीं

फ़हीम शनास काज़मी

ऐ नक़्श-गरो लौह-ए-तहरीर हमें दे दो

एज़ाज़ अफ़ज़ल

शहर-ए-बीना के लोग

एजाज़ रिज़वी

हर्फ़

एजाज़ फ़ारूक़ी

जब कभी दर्द की तस्वीर बनाने निकले

अहया भोजपुरी

कुछ मिरे शौक़ ने दर-पर्दा कहा हो जैसे

एहतिशाम हुसैन

इश्क़ की दुनिया में इक हंगामा बरपा कर दिया

एहसान दानिश

आज भड़की रग-ए-वहशत तिरे दीवानों की

एहसान दानिश

इस शहर-ए-निगाराँ की कुछ बात निराली है

दिवाकर राही

किस के सपनों से मिरी नींद सजी रहती है

दिनेश नायडू

डरा रहे हैं ये मंज़र भी अब तो घर के मुझे

दिनेश नायडू

अहमक़ों की कांफ्रेंस

दिलावर फ़िगार

नींद में खुलते हुए ख़्वाब की उर्यानी पर

दिलावर अली आज़र

मख़्फ़ी हैं अभी दिरहम-ओ-दीनार हमारे

दिलावर अली आज़र

खींच कर अक्स फ़साने से अलग हो जाओ

दिलावर अली आज़र

बना रहा था कोई आब ओ ख़ाक से कुछ और

दिलावर अली आज़र

मज़दूर

दाऊद ग़ाज़ी

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