तीर Poetry (page 6)

हम-जिंस अगर मिले न कोई आसमान पर

शकेब जलाली

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

हाल उस का तिरे चेहरे पे लिखा लगता है

शहज़ाद अहमद

सोच रहा है इतना क्यूँ ऐ दस्त-ए-बे-ताख़ीर निकाल

शाहिद कमाल

ख़ुद मुझ को मेरे दस्त-ए-कमाँ-गीर से मिला

शाहिद कमाल

ख़ुद मुझ को मेरे दस्त-ए-कमाँ-गीर से मिला

शाहिद कमाल

जो मिरी पुश्त में पैवस्त है उस तीर को देख

शाहिद कमाल

ज़मीं पे चल न सका आसमान से भी गया

शाहिद कबीर

किस किस के आँसू पूछोगे और किस किस को बहलाओगे

शाहिद इश्क़ी

नक़्श करता रम-ओ-रफ़्तार इनाँ-गीर को मैं

शाहीन अब्बास

उस काकुल-ए-पुर-ख़म का ख़लल जाए तो अच्छा

शाह नसीर

न क्यूँ कि अश्क-ए-मुसलसल हो रहनुमा दिल का

शाह नसीर

ख़ानदान-ए-क़ैस का मैं तो सदा से पीर हूँ

शाह नसीर

फ़ुर्सत एक दम की है जूँ हबाब पानी याँ

शाह नसीर

चश्म में कब अश्क भर लाते हैं हम

शाह नसीर

उट्ठी है जब से दिल में मिरे इश्क़ की तरंग

शाह आसिम

सन लेवे अगर तू मिरी दिलदार की आवाज़

शाह आसिम

इश्क़ के अक़्लीम में चाल-ओ-चलन कुछ और है

शाह आसिम

तुम्हारी याद तो लिपटी है पूरे घर के मंज़र से

सगुफ़ता यासमीन

वो जिन की छाँव में पले बड़े हुए

शफ़ीक़ सलीमी

बजा कि हर कोई अपनी ही अहमियत चाहे

शफ़ीक़ सलीमी

ख़ुद अपनी आँच से इक शख़्स जल गया मुझ में

शफ़ी ज़ामिन

न जान कर गुल-ए-बाज़ी बहुत उछाल के फेंक

शाद लखनवी

हम से दो-चार बज़्म में ध्यान और की तरफ़

शाद लखनवी

वो कहाँ वक़्त कि मोड़ेंगे इनाँ और तरफ़

शानुल हक़ हक़्क़ी

जज़्बा-ए-मोहब्बत को तीर-ए-बे-ख़ता पाया

शाद आरफ़ी

रंग उड़ कर रौनक़-ए-तस्वीर आधी रह गई

सेहर इश्क़ाबादी

जो मेरे तंगना-ए-दिल में तुझ को जल्वा-गर देखा

सीमाब अकबराबादी

मेरे ख़तों को जलाने से कुछ नहीं होगा

सीमा शर्मा मेरठी

इश्क़ है दरिया-ए-आतिश तैर कर जाने का नाम

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

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