आंगन Poetry (page 13)

पिछले पहर की दस्तक

अबरार अहमद

मिट्टी थी किस जगह की

अबरार अहमद

मौत दिल से लिपट गई उस शब

अबरार अहमद

और किस का घर कुशादा है कहाँ ठहरेगी रात

आबिद मुनावरी

जो शख़्स तुझ को फ़रिश्ता दिखाई देता है

आबिद आलमी

जब से अल्फ़ाज़ के जंगल में घिरा है कोई

आबिद आलमी

ताज़ा-दम जवानी रख

अब्दुस्समद ’तपिश’

अलविदा

अब्दुल अहद साज़

अब परिंदों की यहाँ नक़्ल-ए-मकानी कम है

अब्बास ताबिश

सिलसिले सब रुक गए दिल हाथ से जाता रहा

आज़िम कोहली

हवा आई न ईंधन आ रहा है

आतिफ़ कमाल राना

बादबाँ खोलेगी और बंद-ए-क़बा ले जाएगी

आशुफ़्ता चंगेज़ी

एक नज़्म

आनिस मुईन

हो गए आँगन जुदा और रास्ते भी बट गए

आनन्द सरूप अंजुम

आज़माइश में कटी कुछ इम्तिहानों में रही

आनन्द सरूप अंजुम

वही आँगन वही खिड़की वही दर याद आता है

आलोक श्रीवास्तव

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