अंदर Poetry (page 32)

हैरत के दफ़्तर जाऊँ

अकरम नक़्क़ाश

यूँ ही रक्खोगे इम्तिहाँ में क्या

अकरम महमूद

ख़ाक से ख़्वाब तलक एक सी वीरानी है

अकरम महमूद

तफ़ाउत

अख़्तर-उल-ईमान

सब्ज़ा-ए-बेगाना

अख़्तर-उल-ईमान

नन्हा क़ासिद

अख़्तर शीरानी

जो क़तरे में समुंदर देखते हैं

अख़तर शाहजहाँपुरी

एक कहानी

अख़्तर रज़ा सलीमी

तूफ़ाँ से क़र्या क़र्या एक हुए

अख़्तर होशियारपुरी

क़र्या-ए-जाँ से गुज़र कर हम ने ये देखा भी है

अख़्तर होशियारपुरी

फिर ये हुआ कि लोग दरीचों से हट गए

अख़्तर होशियारपुरी

पहले तो सोच के दोज़ख़ में जलाता है मुझे

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाहिशें इतनी बढ़ीं इंसान आधा रह गया

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाब-महल में कौन सर-ए-शाम आ कर पत्थर मारता है

अख़्तर होशियारपुरी

बजा कि दुश्मन-ए-जाँ शहर-ए-जाँ के बाहर है

अख़्तर होशियारपुरी

ये सारी धूल मिरी है ये सब ग़ुबार मिरा

अकबर मासूम

नींद में गुनगुना रहा हूँ मैं

अकबर मासूम

सच्चा दिया

अकबर हैदराबादी

हर चंद बगूला मुज़्तर है इक जोश तो उस के अंदर है

अकबर इलाहाबादी

फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं

अकबर इलाहाबादी

जल्वा-ए-दरबार-ए-देहली

अकबर इलाहाबादी

दरबार1911

अकबर इलाहाबादी

ख़ुशी है सब को कि ऑपरेशन में ख़ूब निश्तर ये चल रहा है

अकबर इलाहाबादी

फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं

अकबर इलाहाबादी

दिल-ए-मायूस में वो शोरिशें बरपा नहीं होतीं

अकबर इलाहाबादी

वक़्त-ए-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ

अजमल अजमली

मेरे अंदर जो इक फ़क़ीरी है

अजय सहाब

फिर वही लम्बी दो-पहरें हैं फिर वही दिल की हालत है

ऐतबार साजिद

फिर वही लम्बी दो-पहरें हैं फिर वही दिल की हालत है

ऐतबार साजिद

मैं तकिए पर सितारे बो हा हूँ

ऐतबार साजिद

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