बात Poetry (page 79)

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था

दाग़ देहलवी

तुम आईना ही न हर बार देखते जाओ

दाग़ देहलवी

सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-उल्फ़त कभी न करना

दाग़ देहलवी

साफ़ कब इम्तिहान लेते हैं

दाग़ देहलवी

फिरे राह से वो यहाँ आते आते

दाग़ देहलवी

फिर शब-ए-ग़म ने मुझे शक्ल दिखाई क्यूँकर

दाग़ देहलवी

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए

दाग़ देहलवी

मुमकिन नहीं कि तेरी मोहब्बत की बू न हो

दाग़ देहलवी

मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है

दाग़ देहलवी

क्या तर्ज़-ए-कलाम हो गई है

दाग़ देहलवी

कुछ लाग कुछ लगाव मोहब्बत में चाहिए

दाग़ देहलवी

खुलता नहीं है राज़ हमारे बयान से

दाग़ देहलवी

काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने

दाग़ देहलवी

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें

दाग़ देहलवी

देख कर जौबन तिरा किस किस को हैरानी हुई

दाग़ देहलवी

अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम

दाग़ देहलवी

आरज़ू है वफ़ा करे कोई

दाग़ देहलवी

खुलती है चाँदनी जहाँ वो कोई बाम और है

डी. राज कँवल

दुनिया पत्थर फेंक रही है झुँझला कर फ़र्ज़ानों पर

डी. राज कँवल

हर अदा मश्कूक तेरी मुश्तबा हर बात है

चूँचाल सियालकोटी

काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे

चित्रांश खरे

दोनों की आरज़ू में चमक बरक़रार है

चित्रांश खरे

रात की बात का मज़कूर ही क्या

चराग़ हसन हसरत

तन्हाई में आज उन से मुलाक़ात हुई है

चरख़ चिन्योटी

मचलेंगे उन के आने पे जज़्बात सैंकड़ों

चरख़ चिन्योटी

जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है

चरख़ चिन्योटी

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

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