बात Poetry (page 80)

फ़ज़ा-ए-ना-उमीदी में उमीद-अफ़ज़ा पयाम आया

चरख़ चिन्योटी

बात कहने के लिए बात बनाई न गई

चरख़ चिन्योटी

बात कहने के लिए बात बनाई न गई

चरख़ चिन्योटी

अक़्ल हैरान है रहमत का तक़ाज़ा क्या है

चरख़ चिन्योटी

समंदर का सुकूत

चन्द्रभान ख़याल

सभी सम्तों को ठुकरा कर उड़ी जाए

चंद्र प्रकाश शाद

कैसा वो मौसम था ये तो समझ न पाए हम

चंद्र प्रकाश शाद

वो क्या जवाब दे अर्ज़-ए-सवाल से पहले

चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी

पहले तो उस की ज़ात ग़ज़ल में समेट लूँ

चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी

ज़िंदगी की यही कहानी है

चाँदनी पांडे

हमें बर्बादियों पे मुस्कुराना ख़ूब आता है

चाँदनी पांडे

रामायण का एक सीन

चकबस्त ब्रिज नारायण

दिल के ज़ख़्मों की चुभन दीदा-ए-तर से पूछो

बुशरा हाश्मी

आँखों को अब निगाह की आदत नहीं रही

बुशरा हाश्मी

मोहब्बत में कोई सदमा उठाना चाहिए था

बुशरा एजाज़

ख़ुद को तमाशा ख़ूब बनाता रहा हूँ मैं

बबल्स होरा सबा

इस क़दर बढ़ गई वहशत तिरे दीवाने की

बूम मेरठी

अल्लाह अल्लाह वस्ल की शब इस क़दर ए'जाज़ है

बूम मेरठी

अगर दुश्मन की थोड़ी सी मरम्मत और हो जाती

बूम मेरठी

सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते

बिस्मिल सईदी

अब वादा-ए-फ़र्दा में कशिश कुछ नहीं बाक़ी

बिस्मिल साबरी

हैराँ हूँ कि अब लाऊँ कहाँ से मैं ज़बाँ और

बिस्मिल साबरी

तंग आ गए हैं क्या करें इस ज़िंदगी से हम

बिस्मिल अज़ीमाबादी

जब कभी नाम-ए-मोहम्मद लब पे मेरे आए है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

एआद-ए-हिकायतें

बिमल कृष्ण अश्क

जो दिल में उस को बसाए वो और कुछ न करे

बिमल कृष्ण अश्क

जिस की हर बात में क़हक़हा जज़्ब था मैं न था दोस्तो

बिमल कृष्ण अश्क

अपनी तो कोई बात बनाए नहीं बनी

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

कोई आहट कोई सरगोशी सदा कुछ भी नहीं

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

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