मनुष्य Poetry (page 5)

राज़ उबल पड़े आख़िर आसमाँ के सीनों से

फ़रहत क़ादरी

खो बैठी है सारे ख़द-ओ-ख़ाल अपनी ये दुनिया

फ़रहान सालिम

वो जी गया जो इश्क़ में जी से गुज़र गया

फ़ानी बदायुनी

हासिल-ए-इल्म-ए-बशर जहल का इरफ़ाँ होना

फ़ानी बदायुनी

एक रह-गुज़र पर

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जग में आता है हर बशर तन्हा

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो

दिलावर फ़िगार

हुस्न-ए-अज़ल का जल्वा हमारी नज़र में है

दत्तात्रिया कैफ़ी

जब मोहब्बत का किसी शय पे असर हो जाए

दरवेश भारती

कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला

दर्शन सिंह

ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं

दाग़ देहलवी

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

दाग़ देहलवी

हुब्ब-ए-क़ौमी

चकबस्त ब्रिज नारायण

कुछ ऐसा पास-ए-ग़ैरत उठ गया इस अहद-ए-पुर-फ़न में

चकबस्त ब्रिज नारायण

फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना

चकबस्त ब्रिज नारायण

ख़ुद को तमाशा ख़ूब बनाता रहा हूँ मैं

बबल्स होरा सबा

सब उम्र तो जारी नहीं रहता है सफ़र भी

बिस्मिल आग़ाई

ख़याल को ज़ौ नज़र को ताबिश नफ़स को रख़शंदगी मिलेगी

बिर्ज लाल रअना

दुनिया में वफ़ा-केश बशर ढूँढ रहा हूँ

बिर्ज लाल रअना

मुसाफ़िरों का यहाँ से गुज़र नहीं है क्या

बिल्क़ीस ख़ान

मसल सच है बशर की क़दर नेमत ब'अद होती है

भारतेंदु हरिश्चंद्र

असीरान-ए-क़फ़स सेहन-ए-चमन को याद करते हैं

भारतेंदु हरिश्चंद्र

वो देखते जाते हैं कनखियों से इधर भी

बेख़ुद देहलवी

जिस में सौदा नहीं वो सर ही नहीं

बेखुद बदायुनी

अब आदमी कुछ और हमारी नज़र में है

बेदम शाह वारसी

राज़ है इबरत-असर फ़ितरत की हर तहरीर का

बेबाक भोजपुरी

जिगर-गुदाज़ मआ'नी समझ सको तो कहूँ

बेबाक भोजपुरी

होगा क्या चाँद-नगर सोचते हैं

बशीर मुंज़िर

वहशत में भी रुख़ जानिब-ए-सहरा न करेंगे

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

न रहे नामा ओ पैग़ाम के लाने वाले

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

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