चेहरा Poetry (page 9)

कोई लहजा कोई जुमला कोई चेहरा निकल आया

शाहिद लतीफ़

कोई लहजा कोई जुमला कोई चेहरा निकल आया

शाहिद लतीफ़

रूह को क़ैद किए जिस्म के हालों में रहे

शाहिद कबीर

रेत की लहरों से दरिया की रवानी माँगे

शाहिद कबीर

फूलों से सज गई कहीं सब्ज़ा पहन लिया

शाहिद जमाल

दम अजनबी सदाओं का भरते हो साहिबो

शाहिद अहमद शोएब

मचलते रहते हैं बिस्तर पे ख़्वाब मेरे लिए

शहबाज़ नदीम ज़ियाई

ख़ाक-ज़ादा हूँ मगर ता-ब फ़लक जाता है

शहबाज़ ख़्वाजा

तलाश

शहाब जाफ़री

गुल-ए-ख़ुश-नुमा के लिबास में कि शुआ-ए-नूर में ढल के आ

शायर फतहपुरी

सियाहकार सियह-रू ख़ता-शिआर आया

शाद अज़ीमाबादी

ढूँडोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हम

शाद अज़ीमाबादी

तन्हा खड़े हैं हम सर-ए-बाज़ार क्या करें

शबनम शकील

सामने इक बे-रहम हक़ीक़त नंगी हो कर नाचती है

शबनम शकील

बात ईमा-ओ-इशारत से बढ़ी आप ही आप

शबनम शकील

आईन-ए-वफ़ा इतना भी सादा नहीं होता

शबनम शकील

संग-ए-चेहरा-नुमा तो मैं भी हूँ

शबनम रूमानी

ख़्वाब देखूँ कि रतजगे देखूँ

शबनम रूमानी

नज़्म

शबनम अशाई

नज़्म

शबनम अशाई

मैं

शबनम अशाई

इक महकते गुलाब जैसा है

शबाना यूसुफ़

मुद्दत से ढूँडती है किसी की नज़र मुझे

शाद अमृतसरी

इंतिज़ार था हम को ख़ुशनुमा बहारों का

शाद आरफ़ी

मुंतशिर जब ज़ेहन में लफ़्ज़ों का शीराज़ा हुआ

सीन शीन आलम

लहू पुकार के चुप है ज़मीन बोलती है

सीन शीन आलम

क्या बतलाएँ याद नहीं कब इश्क़ के हम बीमार हुए

सय्यद नुसरत ज़ैदी

दिल का दिलबर जब से दिल की धड़कन होने वाला है

सय्यद ज़िया अल्वी

कहाँ से ढूँढ के लाऊँ पुराने ख़्वाब आँखों में

सावन शुक्ला

घर के बाहर भी तो झाँका जा सकता है

सौरभ शेखर

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