दामन Poetry (page 13)

सरों पे साया ग़ुबार-ए-सफ़र के जैसा है

शफ़क़ सुपुरी

आँखों से मअ'नी-ए-सुख़न-ए-मीर देखते

शफ़क़ सुपुरी

गुल याद न अमवाज-ए-नसीम-ए-सहरी याद

शायर फतहपुरी

क्या ये बुत बैठेंगे ख़ुदा बन कर

शाद लखनवी

गले लिपटे हैं वो बिजली के डर से

शाद लखनवी

सियाहकार सियह-रू ख़ता-शिआर आया

शाद अज़ीमाबादी

न दिल अपना न ग़म अपना न कोई ग़म-गुसार अपना

शाद अज़ीमाबादी

फ़क़त शोर-ए-दिल-ए-पुर-आरज़ू था

शाद अज़ीमाबादी

ख़ुशबुओं से मिरी हर साँस को भर देता है

शबनम वहीद

नज़्म

शबनम अशाई

नींद से आँख वो मिल कर जागे

शायर लखनवी

ख़्वाब से आँख वो मल कर जागे

शायर लखनवी

नज़र चुरा गए इज़हार-ए-मुद्दआ से मिरे

शानुल हक़ हक़्क़ी

मोहब्बत ख़ार-ए-दामन बन के रुस्वा हो गई आख़िर

शानुल हक़ हक़्क़ी

इक तमन्ना कि सहर से कहीं खो जाती है

शानुल हक़ हक़्क़ी

तारे जो आसमाँ से गिरे ख़ाक हो गए

शाद आरफ़ी

जब तक हम हैं मुमकिन ही नहीं ना-महरम महरम हो जाएँ

शाद आरफ़ी

तिरा वहशी कुछ आगे है जुनून-ए-फ़ित्ना-सामाँ से

सेहर इश्क़ाबादी

बेवफ़ाई से वफ़ाओं का सिला मत देना

सीन शीन आलम

फ़िराक़-मौसम के आसमाँ में उजाड़ तारे जुड़े हुए हैं

सीमाब ज़फ़र

मेहमाँ को घर में आए ज़माना गुज़र गया

सीमाब सुल्तानपुरी

लहू से मैं ने लिखा था जो कुछ दीवार-ए-ज़िंदाँ पर

सीमाब अकबराबादी

अब वहाँ दामन-कशी की फ़िक्र दामन-गीर है

सीमाब अकबराबादी

मुरत्तब हो के इक महशर ग़ुबार-ए-दिल से निकलेगा

सीमाब अकबराबादी

ब-क़द्र-ए-शौक़ इक़रार-ए-वफ़ा क्या

सीमाब अकबराबादी

अंजाम हर इक शय का ब-जुज़ ख़ाक नहीं है

सीमाब अकबराबादी

आँख से टपका जो आँसू वो सितारा हो गया

सीमाब अकबराबादी

अब्र ही अब्र है बरसता नईं

सीमा नक़वी

जिस्म-ए-बे-सर कोई बिस्मिल कोई फ़रियादी था

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

हुआ दे कर दबे शो'लों को भड़काया नहीं जाता

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

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