दामन Poetry (page 14)

शम्अ' रौशन कोई कर दे मिरे ग़म-ख़ाने में

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

मुझे मुश्किल में यूँ अंदाज़ा-ए-मुश्किल नहीं होता

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

तो क्या

सय्यद अयाज़ महमूद

किस के हैं ज़ेर-ए-ज़मीं दीदा-ए-नम-नाक हनूज़

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जो गुज़री मुझ पे मत उस से कहो हुआ सो हुआ

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बरहमन बुत-कदे के शैख़ बैतुल्लाह के सदक़े

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बहार-ए-गुल से अब दौर-ए-ख़िज़ाँ तक

सत्यपाल जाँबाज़

लाख हो माज़ी दामन-गीर

सरदार सोज़

हम-सफ़र होता कोई तो बाँट लेते दूरियाँ

सरदार अंजुम

है तिरा इंतिज़ार गुलशन में

सरदार अंजुम

खाते हैं हम हचकोले इस पागल संसार के बीच

सरस्वती सरन कैफ़

चराग़ जब मेरा कमरा नापता है

सारा शगुफ़्ता

पाम के पेड़ से गुफ़्तुगू

साक़ी फ़ारुक़ी

यूँ मिरे पास से हो कर न गुज़र जाना था

साक़ी फ़ारुक़ी

सोच में डूबा हुआ हूँ अक्स अपना देख कर

साक़ी फ़ारुक़ी

सब कुछ न कहीं सोग मनाने में चला जाए

साक़ी फ़ारुक़ी

मौत ने पर्दा करते करते पर्दा छोड़ दिया

साक़ी फ़ारुक़ी

वो गुम हुए हैं मुसाफ़िर रह-ए-तमन्ना में

समद अंसारी

आईना-दिल दाग़-ए-तमन्ना के लिए था

समद अंसारी

हम झुकाते भी कहाँ सर को क़ज़ा से पहले

सलमा शाहीन

चश्म-ए-नम पहले शफ़क़ बन के सँवरना चाहे

सलमा शाहीन

आ रहा होगा वो दामन से हवा बाँधे हुए

सालिम सलीम

जिस्म की सतह पे तूफ़ान किया जाएगा

सालिम सलीम

जाने कैसे होंगे आँसू बहते हैं तो बहने दो

सलीम रज़ा रीवा

जो तेरी बज़्म से उट्ठा वो इस तरह उट्ठा

सालिक लखनवी

पा-ब-गिल

सलीमुर्रहमान

अपने जीने के हम अस्बाब दिखाते हैं तुम्हें

सलीम सिद्दीक़ी

आब ओ हवा है बरसर-ए-पैकार कौन है

सलीम कौसर

कहीं आँखें कहीं बाज़ू कहीं से सर निकल आए

सलीम फ़िगार

फ़स्ल-ए-जुनूँ में दामन-ओ-दिल चाक भी नहीं

सलीम फ़राज़

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