दामन Poetry (page 11)

जल्वा-ए-हुस्न-ए-करम का आसरा करता हूँ मैं

शकील बदायुनी

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ

शकील बदायुनी

ख़मोशी बोल उठ्ठे हर नज़र पैग़ाम हो जाए

शकेब जलाली

ये सितारे मुझे दीवार नहीं होने के

शाइस्ता सहर

दीवार-ए-गिर्या

शाइस्ता मुफ़्ती

आज लगता है समुंदर में है तुग़्यानी सी

शाइस्ता मुफ़्ती

मौत मेरी सखी

शाइस्ता हबीब

रिश्ता-ए-उमर-दराज़ अपना मैं कोताह करूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ने शिकवा-मंद दिल से न अज़-दस्त-दीदा हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मय हो अब्र ओ हवा नहीं तो न हो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जो मिरे हम-अस्र हम-सोहबत थे सो सब मर गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जल्वा-गर फ़ानूस-ए-तन में है हमारा मन चराग़

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बे तिरे जान न थी जान मिरी जान के बीच

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ऐ हवाओ! मुझे दामन में छुपा ले जाओ

शैदा रूमानी

इस दश्त की वुसअत में सिमट कर नहीं देखा

शहज़ाद क़मर

जहाँ में हम ने किसी से भी खुल के बात न की

शहज़ाद अहमद

उम्र जितनी भी कटी उस के भरोसे पे कटी

शहज़ाद अहमद

कैसे गुज़र सकेंगे ज़माने बहार के

शहज़ाद अहमद

मौत

शहरयार

ख़्वाब

शहरयार

शम-ए-दिल शम-ए-तमन्ना न जला मान भी जा

शहरयार

मंज़र गुज़िश्ता शब के दामन में भर रहा है

शहरयार

कब समाँ देखेंगे हम ज़ख़्मों के भर जाने का

शहरयार

ऐसे हिज्र के मौसम कब कब आते हैं

शहरयार

हम-सफ़र ज़ीस्त का सूरज को बनाए रक्खा

शहनाज़ नूर

अगली रुत की नमाज़

शहनाज़ नबी

मोहब्बत से तिरी यादें जगा कर सो रहा हूँ

शहनवाज़ ज़ैदी

मेज़ पे चेहरा ज़ुल्फ़ें काग़ज़ पर

शहनवाज़ ज़ैदी

उसे जब भी देखा बहुत ध्यान से

शाहिदा तबस्सुम

रात ही के दामन में चाँद भी हैं तारे भी

शाहिद लतीफ़

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