दम Poetry (page 20)

आ के अब जंगल में ये उक़्दा खुला

सलीम अहमद

सुब्ह-दम भी यूँ फ़सुर्दा हो गया

सलाम मछली शहरी

आवाज़ों से जिस्म हुआ नम

सलाहुद्दीन महमूद

नज़'अ के दम भी उन्हें हिचकी न आएगी कभी

सख़ी लख़नवी

उन की चुटकी में दिल न मल जाता

सख़ी लख़नवी

हम पे जौर-ओ-सितम के क्या मअनी

सख़ी लख़नवी

है चमन में रहम गुलचीं को न कुछ सय्याद को

सख़ी लख़नवी

बहार आ कर जो गुलशन में वो गाएँ

सख़ी लख़नवी

बाढ़

सज्जाद ज़हीर

गुज़रा है नागवार उन्हें बे-कसी का शोर

सज्जाद शम्सी

हमारे दम से है रौशन दयार-ए-फ़िक्र-ओ-सुख़न

सज्जाद बाक़र रिज़वी

पूछो मुझे ऐ हम-नफ़साँ कौन हूँ क्या हूँ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

मिरे सफ़र की हदें ख़त्म अब कहाँ होंगी

सज्जाद बाक़र रिज़वी

'बाक़र' निशाना-ए-ग़म-ओ-रंज-ओ-अलम तो हो

सज्जाद बाक़र रिज़वी

खोल कर बात का भरम दोनों

सज्जाद बलूच

खोल कर बात का भरम दोनों

सज्जाद बलूच

इक सवाल ख़ुदा-ए-बरतर से

साजिदा ज़ैदी

तू ने पूछा है मिरे दोस्त!

साइमा असमा

सुनते रहते हैं फ़क़त कुछ वो नहीं कह सकते

साइमा असमा

दयार-ए-दिल से किसी का गुज़र ज़रूरी था

साइम जी

बड़े ख़तरे में है हुस्न-ए-गुलिस्ताँ हम न कहते थे

सैफ़ुद्दीन सैफ़

मेरी मंज़िल भी आसमान में है

साहिर शेवी

सर-ज़मीन-ए-यास

साहिर लुधियानवी

फिर वही कुंज-ए-क़फ़स

साहिर लुधियानवी

मुझे सोचने दे

साहिर लुधियानवी

माज़ूरी

साहिर लुधियानवी

ख़ुद-कुशी से पहले

साहिर लुधियानवी

बंगाल

साहिर लुधियानवी

आवाज़-ए-आदम

साहिर लुधियानवी

आज

साहिर लुधियानवी

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