दिल Poetry (page 59)

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सय्यद मोहम्मद जाफ़री

ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

अब और तब

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

आदमी

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

तिरे नज़दीक आता जा रहा हूँ

सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़

किस हसीं ख़्वाब का फ़साना है

सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़

ग़म-हा-ए-रोज़गार से फ़ुर्सत नहीं मुझे

सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़

कुछ इस अंदाज़ से हैं दश्त में आहू निकल आए

सय्यद मंज़ूर हैदर

लिखा है गो तेरी क़िस्मत में 'शौकत' चश्म-ए-तर रखना

सय्यद काज़िम अली शौकत बिलगिरामी

जब मैं रोया हूँ वो रोए हैं ये उल्फ़त मेरे साथ

सय्यद काज़िम अली शौकत बिलगिरामी

मेरी उम्र में बहुत से वक़्त नहीं आए

सय्यद काशिफ़ रज़ा

हम अपनी ज़िंदगी के लिए शुक्र-गुज़ार हैं

सय्यद काशिफ़ रज़ा

एक मुजस्समे की ज़ियारत

सय्यद काशिफ़ रज़ा

ये कज-अदाई ये ग़म्ज़ा तिरा कभी फिर यार!

सय्यद काशिफ़ रज़ा

ये कैसी आया-ए-मोजिज़-नुमा निकल आई

सय्यद काशिफ़ रज़ा

वो याद कर भी रहा हो तो फ़ाएदा क्या है

सय्यद काशिफ़ रज़ा

वो सैर-ए-गुल के वास्ते आ ही नहीं रहा

सय्यद काशिफ़ रज़ा

उस पर निगाह फिरती रही और दूर दूर

सय्यद काशिफ़ रज़ा

तिरी जुदाई में ये दिल बहुत दुखी तो नहीं

सय्यद काशिफ़ रज़ा

तिरी आँखों को तेरे हुस्न का दर जाना था

सय्यद काशिफ़ रज़ा

सग-ए-जमाल हूँ गर्दन से बाँध कर ले जा

सय्यद काशिफ़ रज़ा

रद्द-ओ-कद के भी ब'अद रह जाए

सय्यद काशिफ़ रज़ा

क़रार दीदा-ओ-दिल में रहा नहीं है बहुत

सय्यद काशिफ़ रज़ा

पुल-ए-सिरात न था दश्त-ए-नैनवा भी न था

सय्यद काशिफ़ रज़ा

निगह की शोला-फ़ज़ाई को कम है दीद उस की

सय्यद काशिफ़ रज़ा

ख़ुदा हुआ न कोई और ही गवाह हुआ

सय्यद काशिफ़ रज़ा

ख़ैर की नज़्र की है या शर की

सय्यद काशिफ़ रज़ा

जो साँस साँस सही उस सज़ा का नाम न लो

सय्यद काशिफ़ रज़ा

इसी ख़याल से दिल की रफ़ू-गरी नहीं की

सय्यद काशिफ़ रज़ा

फ़क़त क़याम का मतलब गुज़र-बसर कोई है

सय्यद काशिफ़ रज़ा

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