दुनिया Poetry (page 86)

हर चंद उन्हें अहद फ़रामोश न होगा

अंजुम रूमानी

तुझ को दुनिया के साथ चलना है

अंजुम रहबर

मिरी आवाज़ सुन कर ज़िंदगी बेदार हो जैसे

अंजुम नियाज़ी

यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे

अंजुम ख़लीक़

कुछ उज़्र पस-ए-वा'दा-ख़िलाफ़ी नहीं रखते

अंजुम ख़लीक़

कहो क्या मेहरबाँ ना-मेहरबाँ तक़दीर होती है

अंजुम ख़लीक़

कहाँ तक और इस दुनिया से डरते ही चले जाना

अंजुम ख़लीक़

किस का भेद कहाँ की क़िस्मत पगले किस जंजाल में है

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

ज़हर लगता है ये आदत के मुताबिक़ मुझ को

अंजुम बाराबंकवी

किताब-ए-इश्क़ के जो मो'तबर रिसाले हैं

अंजुम बाराबंकवी

झूटी बातें झूटे लोग

अंजुम बाराबंकवी

हम सब को बताते रहते हैं ये बात पुरानी काम की है

अंजुम बाराबंकवी

ख़ाली भी तो कर ख़ाना-ए-दिल दुनिया से

अंजुम आज़मी

वा'दा है कि जब रोज़-ए-जज़ा आएगा

अंजुम आज़मी

मेरी दुनिया में अभी रक़्स-ए-शरर होता है

अंजुम आज़मी

जो शब भर आँसुओं से तर रहेगा

अंजुम आज़मी

एक सौदा है लज़्ज़त-ए-ग़म है

अंजुम आज़मी

अनजाने ख़्वाब की ख़ातिर क्यूँ चैन गँवाया

अंजुम अंसारी

तीर बरसे कभी ख़ंजर आए

अंजना संधीर

माल-ए-दुनिया तलाश करना है

अनीस अब्र

हर एक पल मुझे दुख दर्द बे-शुमार मिले

अनीस अब्र

एक नज़्म

अनीस नागी

इसी ज़मीं पे इसी आसमाँ में रहना है

अनीस अशफ़ाक़

हँसती आँखें हँसता चेहरा इक मजबूर बहाना है

अंदलीब शादानी

वो दुनिया थी जहाँ तुम रोक लेते थे ज़बाँ मेरी

आनंद नारायण मुल्ला

कहने को लफ़्ज़ दो हैं उम्मीद और हसरत

आनंद नारायण मुल्ला

ज़िंदगी गो कुश्ता-ए-आलाम है

आनंद नारायण मुल्ला

क़हर की क्यूँ निगाह है प्यारे

आनंद नारायण मुल्ला

मिरी बातों पे दुनिया की हँसी कम होती जाती है

आनंद नारायण मुल्ला

जब दिल में ज़रा भी आस न हो इज़्हार-ए-तमन्ना कौन करे

आनंद नारायण मुल्ला

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