भावना Poetry (page 8)

हर गोशा-ए-नज़र में समाए हुए हो तुम

शकील बदायुनी

बे-कसी से मरने मरने का भरम रह जाएगा

शकील बदायुनी

बदले बदले मिरे ग़म-ख़्वार नज़र आते हैं

शकील बदायुनी

नदी का आब दिया है तो कुछ बहाव भी दे

शकील आज़मी

कहीं से चाँद कहीं से क़ुतुब-नुमा निकला

शकील आज़मी

दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले

शकील आज़मी

चाँद में ढलने सितारों में निकलने के लिए

शकील आज़मी

मुजरिम

शकेब जलाली

गुरेज़-पा

शकेब जलाली

रुख़्सार आज धो कर शबनम ने पंखुड़ी के

शकेब जलाली

जिस दम क़फ़स में मौसम-ए-गुल की ख़बर गई

शकेब जलाली

गूँजता है नाला-ए-महताब आधी रात को

शकेब जलाली

शाम आ कर झरोकों में बैठी रहे

शाइस्ता मुफ़्ती

शिकस्ता छत में परिंदों को जब ठिकाना मिला

शहज़ाद नय्यर

तेरी क़ुर्बत में गुज़ारे हुए कुछ लम्हे हैं

शहज़ाद अहमद

सूरज की किरन देख के बेज़ार हुए हो

शहज़ाद अहमद

ख़ल्क़ ने छीन ली मुझ से मिरी तन्हाई तक

शहज़ाद अहमद

कौन कहता है कि दरिया में रवानी कम है

शहज़ाद अहमद

हिज्र की रात मिरी जाँ पे बनी हो जैसे

शहज़ाद अहमद

दिल ओ दिमाग़ में एहसास-ए-ग़म उभार दिया

शहज़ाद अहमद

चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

शहज़ाद अहमद

अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है

शहज़ाद अहमद

अब न वो शोर न वो शोर मचाने वाले

शहज़ाद अहमद

आज तक उस की मोहब्बत का नशा तारी है

शहज़ाद अहमद

ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो थी नहीं कुछ कम है

शहरयार

उम्मीद ओ बीम

शहरयार

ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो' थी नहीं कुछ कम है

शहरयार

ज़ख़्मों को रफ़ू कर लें दिल शाद करें फिर से

शहरयार

कहने को तो हर बात कही तेरे मुक़ाबिल

शहरयार

याद की बस्ती का यूँ तो हर मकाँ ख़ाली हुआ

शहराम सर्मदी

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