समाचार Poetry (page 24)

आँच आएगी न अंदर की ज़बाँ तक ऐ दिल

रियाज़ मजीद

सुकूत-ए-शाम में गूँजी सदा उदासी की

रहमान फ़ारिस

नज़र उठाएँ तो क्या क्या फ़साना बनता है

रहमान फ़ारिस

क्यूँ तिरे साथ रहीं उम्र बसर होने तक

रहमान फ़ारिस

अंजाम-ए-इंतिहा-ए-सफ़र देखते चलें

रहबर जौनपूरी

दिल को रह रह के ये अंदेशे डराने लग जाएँ

रेहाना रूही

शायद कभी ऐसा हो कुछ फ़िल्म सा कर जाऊँ

रज़्ज़ाक़ अरशद

शहर अपना है मगर लोग कहाँ हैं अपने

रज़्ज़ाक़ अफ़सर

खुले में छोड़ रखा है मगर सलीक़े से

राज़िक़ अंसारी

आँसू अपनी चश्म-ए-तर से निकलें तो

राज़िक़ अंसारी

शब-ए-दराज़ तुझे कुछ ख़बर गई कि नहीं

रज़ी रज़ीउद्दीन

उन की निगाह-ए-नाज़ के क़ाबिल कहें जिसे

रज़ा जौनपुरी

ये दौर-ए-मसर्रत ये तेवर तुम्हारे

रज़ा हमदानी

नाज़ का मारा हुआ हूँ मैं अदा की सौगंद

रज़ा अज़ीमाबादी

हर नफ़स मूरिद-ए-सफ़र हैं हम

रज़ा अज़ीमाबादी

क्या कहूँ क्या मिला है क्या न मिला

रविश सिद्दीक़ी

कौन कहता मुझे शाइस्ता-ए-तहज़ीब-ए-जुनूँ

रविश सिद्दीक़ी

इश्क़ दुश्वार नहीं ख़ुश-नज़री मुश्किल है

रविश सिद्दीक़ी

रब्त हो ग़ैर से अगर कुछ है

रौनक़ टोंकवी

दौड़े वो मेरे क़त्ल को तलवार खींच कर

रौनक़ टोंकवी

उमूद हो के उफ़ुक़ में बदल रहे हैं सुतून

रउफ़ ख़लिश

सिलसिले ये कैसे हैं टूट कर नहीं मिलते

रउफ़ ख़लिश

वो ख़ुश-सुख़न तो किसी पैरवी से ख़ुश न हुआ

रऊफ़ ख़ैर

मिरी दिन के उजालों पर नज़र है

रसूल साक़ी

कितनी ठंडी थी हवा क़र्या-ए-बर्फ़ानी की

रासिख़ इरफ़ानी

न जाने कब बसर हुए न जाने कब गुज़र गए

रशक खलीली

ग़नीमत है हँस कर अगर बात की

राशिद मुफ़्ती

मौसम के मुताबिक़ कोई सामाँ भी नहीं है

राशिद जमाल फ़ारूक़ी

मैं दश्त-ए-शेर में यूँ राएगाँ तो होता रहा

राशिद जमाल फ़ारूक़ी

इक घना सा शजर मिरे बाज़ू

रशीद इमकान

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