समाचार Poetry (page 39)

हरम है क्या चीज़ दैर क्या है किसी पे मेरी नज़र नहीं है

फ़ना बुलंदशहरी

जो दिल को पहले मयस्सर था क्या हुआ उस का

फ़ैज़ी

दोनों जहाँ से आ गया कर के इधर उधर की सैर

फ़ैज़ान हाशमी

ये मातम-ए-वक़्त की घड़ी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

क़ैद-ए-तन्हाई

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मेरे मिलने वाले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इक़बाल

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज की रात

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सुब्ह की आज जो रंगत है वो पहले तो न थी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

न गँवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल-ए-रेज़ा-रेज़ा गँवा दिया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गिरानी-ए-शब-ए-हिज्राँ दो-चंद क्या करते

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चश्म-ए-मयगूँ ज़रा इधर कर दे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आवाज़ दे रहा था कोई मुझ को ख़्वाब में

फ़ैसल अजमी

मुझ को ये फ़िक्र कब है कि साया कहाँ गया

फ़ैसल अजमी

अदावतों में जो ख़ल्क़-ए-ख़ुदा लगी हुई है

फ़ैसल अजमी

तुम ऐसा करना कि कोई जुगनू कोई सितारा सँभाल रखना

एज़ाज़ अहमद आज़र

आज दिल है कि सर-ए-शाम बुझा लगता है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

उस ने देखा था अजब एक तमाशा मुझ में

एजाज़ उबैद

यहीं था बैठा हुआ दरमियाँ कहाँ गया मैं

एजाज़ गुल

जो क़िस्सा-गो ने सुनाया वही सुना गया है

एजाज़ गुल

गली से अपनी उठाता है वो बहाने से

एजाज़ गुल

सदा-ए-अहद-ए-वफ़ा को ज़वाल क्यूँ आया

एजाज़ अासिफ़

हर एक शय की हक़ीक़त से बा-ख़बर देखूँ

एजाज़ अासिफ़

ख़ुद को जब लग गई नज़र अपनी

एजाज़ तालिब

शेर के रूप में देते रहना

एहतराम इस्लाम

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