समाचार Poetry (page 41)

तुझे क्या ख़बर मिरे हम-सफ़र मिरा मरहला कोई और है

दर्शन सिंह

क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात से अहल-ए-जहाँ मफ़र नहीं

दर्शन सिंह

जब आदमी मुद्दआ-ए-हक़ है तो क्या कहें मुद्दआ' कहाँ है

दर्शन सिंह

बहुत मुश्किल है तर्क-ए-आरज़ू रब्त-आश्ना हो कर

दर्शन सिंह

टुक ख़बर ले कि हर घड़ी हम को

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

चमन में सुब्ह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ये मो'जिज़ा भी दिखाती है सब्ज़ आग मुझे

दानियाल तरीर

शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता

दानियाल तरीर

दुआ हमारी कभी बा-असर नहीं होती

दानिश फ़राही

क्या ख़बर थी मुन्हरिफ़ अहल-ए-जहाँ हो जाएँगे

दानिश अलीगढ़ी

तुम को आशुफ़्ता-मिज़ाजों की ख़बर से क्या काम

दाग़ देहलवी

क़त्ल की सुन के ख़बर ईद मनाई मैं ने

दाग़ देहलवी

जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक

दाग़ देहलवी

शब-ए-वस्ल ज़िद में बसर हो गई

दाग़ देहलवी

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

दाग़ देहलवी

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

दाग़ देहलवी

क़रीने से अजब आरास्ता क़ातिल की महफ़िल है

दाग़ देहलवी

मोहब्बत का असर जाता कहाँ है

दाग़ देहलवी

मिन्नतों से भी न वो हूर-शमाइल आया

दाग़ देहलवी

मज़े इश्क़ के कुछ वही जानते हैं

दाग़ देहलवी

काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है

दाग़ देहलवी

खुलती है चाँदनी जहाँ वो कोई बाम और है

डी. राज कँवल

काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे

चित्रांश खरे

जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है

चरख़ चिन्योटी

नींद के तआक़ुब में

चन्द्रभान ख़याल

हर आरज़ू में रंग है बाग़-ओ-बहार का

चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी

रामायण का एक सीन

चकबस्त ब्रिज नारायण

कुछ ऐसा पास-ए-ग़ैरत उठ गया इस अहद-ए-पुर-फ़न में

चकबस्त ब्रिज नारायण

फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना

चकबस्त ब्रिज नारायण

ज़ौ-बार इसी सम्त हुए शम्स-ओ-क़मर भी

ब्रहमा नन्द जलीस

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