समाचार Poetry (page 43)

तरहदार कहाँ से लाऊँ

बेबाक भोजपुरी

बड़ी दिल-शिकन है रह-ए-सफ़र कोई हम-सफ़र है न यार है

बेबाक भोजपुरी

यार पहलू में निहाँ था मुझे मा'लूम न था

बयान मेरठी

उन का बर्बाद-ए-करम कहने के क़ाबिल हो गया

बासित भोपाली

कोई मेयार-ए-मोहब्बत न रहा मेरे बा'द

बासित भोपाली

चमकी थी एक बर्क़ सी फूलों के आस-पास

बासिर सुल्तान काज़मी

हर-चंद मेरे हाल से वो बे-ख़बर नहीं

बासिर सुल्तान काज़मी

है दुनिया में ज़बाँ मेरी अगर बंद

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

किसे ख़बर है मैं दिल से कि जाँ से गुज़रूँगा

बशीर सैफ़ी

इस बहर-ए-बे-सदा में कुछ और नीचे जाएँ

बशीर सैफ़ी

इक हुस्न-ए-बे-मिसाल के जो रू-ब-रू हूँ मैं

बशीर सैफ़ी

रुख़ तुम्हारा हो जिधर हम भी उधर हो जाएँगे

बशीर महताब

जब से मिरे रक़ीब का रस्ता बदल गया

बशीर महताब

तख़लीक़-ए-काएनात दिगर कर सके तो कर

बशीर फ़ारूक़

कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं

बशीर बद्र

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

बशीर बद्र

इसी शहर में कई साल से मिरे कुछ क़रीबी अज़ीज़ हैं

बशीर बद्र

सर-ए-राह कुछ भी कहा नहीं कभी उस के घर मैं गया नहीं

बशीर बद्र

न जी भर के देखा न कुछ बात की

बशीर बद्र

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

बशीर बद्र

फ़लक से चाँद सितारों से जाम लेना है

बशीर बद्र

जल्वों का उन के दिल को तलब-गार कर दिया

बशीरुद्दीन राज़

हुई मुद्दतें ऐ दिल-ए-हज़ीं न पयाम है न सलाम है

बशीरुद्दीन राज़

गिरफ़्त-ए-ज़ीस्त में हूँ क़ैद-ए-बे-हिसार में हूँ

बशीर अहमद बशीर

दूर तक चारों तरफ़ मेरे सिवा कोई न था

बशीर अहमद बशीर

आहट पे कान दर पे नज़र इस तरह न थी

बशर नवाज़

यूँ भी होने का पता देते हैं

बाक़ी सिद्दीक़ी

यूँ भी होने का पता देते हैं

बाक़ी सिद्दीक़ी

एतिबार-ए-नज़र करें कैसे

बाक़ी सिद्दीक़ी

तेरी तरह मलाल मुझे भी नहीं रहा

बाक़ी अहमदपुरी

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