समाचार Poetry (page 44)

नर्गिस-ए-मस्त तिरी जाए जो तुल बरसर-ए-गुल

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

दस्त-ए-नासेह जो मिरे जेब को इस बार लगा

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

गोडो

बाक़र मेहदी

क्या ख़बर थी कि कभी बे-सर-ओ-सामाँ होंगे

बाक़र मेहदी

जाने क्या सोच के घर तक पहुँचा

बक़ा बलूच

और कुछ देर ग़म नज़र में रख

बकुल देव

जान ले ले न ज़ब्त-ए-आह कहीं

बकुल देव

तिश्नगी-ए-लब पे हम अक्स-ए-आब लिक्खेंगे

बख़्श लाइलपूरी

क़ातिल हुआ ख़मोश तो तलवार बोल उठी

बख़्श लाइलपूरी

पड़े हैं राह में जो लोग बे-सबब कब से

बख़्श लाइलपूरी

हो चुका वाज़ का असर वाइज़

बहराम जी

न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब ओ हुनर

ज़फ़र

दौलत-ए-दुनिया नहीं जाने की हरगिज़ तेरे साथ

ज़फ़र

नहीं इश्क़ में इस का तो रंज हमें कि क़रार ओ शकेब ज़रा न रहा

ज़फ़र

मर गए ऐ वाह उन की नाज़-बरदारी में हम

ज़फ़र

हम ने तिरी ख़ातिर से दिल-ए-ज़ार भी छोड़ा

ज़फ़र

गालियाँ तनख़्वाह ठहरी है अगर बट जाएगी

ज़फ़र

कहीं सुब्ह-ओ-शाम के दरमियाँ कहीं माह-ओ-साल के दरमियाँ

बद्र-ए-आलम ख़लिश

ख़बर शाकी है

बद्र वास्ती

तब

बद्र मुनीरुद्दीन

ख़्वाब-जंगल

अज़रा नक़वी

तुम्हारे आने के ब'अद

अज़रा अब्बास

जिला-वतन होने से पहले

अज़रा अब्बास

चुपके से गुज़रते हैं ख़बर भी नहीं होती

अज़लान शाह

हारे हुए लोगों की कहानी की तरह हैं

अज़लान शाह

यादों का जज़ीरा शब-ए-तन्हाई में

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

अजीब कैफ़ियत आख़िर तलक रही दिल की

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

सफ़र मुदाम सफ़र

अज़ीज़ तमन्नाई

उसी ने साथ दिया ज़िंदगी की राहों में

अज़ीज़ तमन्नाई

दहर में इक तिरे सिवा क्या है

अज़ीज़ तमन्नाई

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