समाचार Poetry (page 46)
गिरते पेड़ों की ज़द में हैं हम लोग
अज़हर फ़राग़
कोई सिलसिला नहीं जावेदाँ तिरे साथ भी तिरे बा'द भी
अज़हर फ़राग़
अपना जैसा भी हाल रक्खा है
अज़हर अदीब
मैं सोचता हूँ सबक़ मैं ने वो पढ़ा ही नहीं
अज़ीज़ परीहारी
पेड़ आँगन के तिरे जब बारवर हो जाएँगे
आज़ाद गुरदासपुरी
तुम्हारे पास रहें हम तो मौत भी क्या है
आज़ाद गुलाटी
दीदार की तलब के तरीक़ों से बे-ख़बर
आज़ाद अंसारी
ये किस मक़ाम पे पहुँचा है कारवान-ए-वफ़ा
अय्यूब साबिर
मता-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र रहा हूँ
अय्यूब साबिर
इक तुम कि हो बे-ख़बर सदा के
अय्यूब ख़ावर
पूछते हैं तुझ को सफ़्फ़ाकी कहाँ रह कर मिली
औरंगज़ेब
कौन गुज़रा था मेहराब-ए-जाँ से अभी ख़ामुशी शोर भरता हुआ
अतीक़ुल्लाह
वो दौर क़रीब आ रहा है
अतहर नफ़ीस
फिर कोई नया ज़ख़्म नया दर्द अता हो
अतहर नफ़ीस
न शाम है न सवेरा अजब दयार में हूँ
अतहर नफ़ीस
शब-गज़ीदा के घर नहीं आती
अतीया नियाज़ी
अन-गिनत अज़ाब हैं रतजगों के दरमियाँ
अतीक़ुर्रहमान सफ़ी
अश्क इन आँखों से हम दिल में बहा कर देखें
अतीक़ अंज़र
तिलिस्म-ए-शब से बहुत बे-ख़बर चले आए
अताउर्रहमान क़ाज़ी
थोड़ी सी उस तरफ़ भी नज़र होनी चाहिए
अताउल हक़ क़ासमी
थोड़ी सी इस तरफ़ भी नज़र होनी चाहिए
अताउल हक़ क़ासमी
मंज़िलें भी ये शिकस्ता-बाल-ओ पर भी देखना
अताउल हक़ क़ासमी
कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से
अता आबिदी
कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से
अता आबिदी
शौक़-ए-गुरेज़ाँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
एक जिला-वतन की वापसी
असरार-उल-हक़ मजाज़
इलाहाबाद से
असरार-उल-हक़ मजाज़
यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर
असरार-उल-हक़ मजाज़
कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए
असरार-उल-हक़ मजाज़
बरहनगी का मुदावा कोई लिबास न था
असरार ज़ैदी
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