समाचार Poetry (page 48)

हम दश्त से हर शाम यही सोच के घर आए

असग़र गोरखपुरी

न कुछ फ़ना की ख़बर है न है बक़ा मालूम

असग़र गोंडवी

मुझ को ख़बर रही न रुख़-ए-बे-नक़ाब की

असग़र गोंडवी

आलम से बे-ख़बर भी हूँ आलम में भी हूँ मैं

असग़र गोंडवी

पाता नहीं जो लज़्ज़त-ए-आह-ए-सहर को मैं

असग़र गोंडवी

मौजों का अक्स है ख़त-ए-जाम-ए-शराब में

असग़र गोंडवी

मजाज़ कैसा कहाँ हक़ीक़त अभी तुझे कुछ ख़बर नहीं है

असग़र गोंडवी

जीने का न कुछ होश न मरने की ख़बर है

असग़र गोंडवी

इश्वों की है न उस निगह-ए-फ़ित्ना-ज़ा की है

असग़र गोंडवी

गुम कर दिया है दीद ने यूँ सर-ब-सर मुझे

असग़र गोंडवी

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

असग़र गोंडवी

वो जो नहीं हैं बज़्म में बज़्म की शान भी नहीं

असर रामपुरी

क़ासिद पयाम उन का न कुछ देर अभी सुना

असर लखनवी

किस तरह खिलते हैं नग़्मों के चमन समझा था मैं

असर लखनवी

मलाल-ए-हिज्र नहीं रंज-ए-बे-रुख़ी भी नहीं

असद जाफ़री

जाऊँ कहाँ शुऊ'र-ए-हुनर किस के पास है

असद जाफ़री

अभी ज़मीन को सौदा बहुत सरों का है

असअ'द बदायुनी

मुझे रहने को वो मिला है घर कि जो आफ़तों की है रहगुज़र

आरज़ू लखनवी

कर पहले दिल पे क़ाबू जामे की फिर ख़बर ले

आरज़ू लखनवी

यूँ दूर दूर दिल से हो हो के दिल-नशीं भी

आरज़ू लखनवी

क़ुर्बत बढ़ा बढ़ा कर बे-ख़ुद बना रहे हैं

आरज़ू लखनवी

जो दिल साथ छुटने से घबरा रहा है

आरज़ू लखनवी

हुस्न से शरह हुई इश्क़ के अफ़्साने की

आरज़ू लखनवी

दिल दे रहा था जो उसे बे-दिल बना दिया

आरज़ू लखनवी

यक़ीन-ए-सुब्ह-ए-चमन है कितना शुऊर-ए-अब्र-ए-बहार क्या है

अर्शी भोपाली

मता-ए-शौक़ तो है दर्द-ए-रोज़गार तो है

अर्शी भोपाली

कभी उन का नहीं आना ख़बर के ज़ैल में था

अरशद कमाल

किया है मैं ने ऐसा क्या कि ऐसा हो गया है

अरशद कमाल

किश्त-ए-एहसास में थोड़ा सा मिला लेंगे तुझे

अरशद जमाल 'सारिम'

कुछ ख़बर देता नहीं उस की दिल-ए-आगह मुझे

अरशद अली ख़ान क़लक़

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