समाचार Poetry (page 58)

हुए ऐसे ब-दिल तिरे शेफ़्ता हम दिल-ओ-जाँ को हमेशा निसार किया

आग़ा हज्जू शरफ़

घिसते घिसते पाँव में ज़ंजीर आधी रह गई

आग़ा हज्जू शरफ़

चलते हैं गुलशन-ए-फ़िरदौस में घर लेते हैं

आग़ा हज्जू शरफ़

पेश आने लगे हैं नफ़रत से

अफ़ज़ल पेशावरी

पानी शजर पे फूल बना देखता रहा

अफ़ज़ाल नवेद

बाग़ क्या क्या शजर दिखाते हैं

अफ़ज़ाल नवेद

तो फिर वो इश्क़ ये नक़्द-ओ-नज़र बराए-फ़रोख़्त

अफ़ज़ल ख़ान

आई थी उस तरफ़ जो हवा कौन ले गया

अफ़ज़ल गौहर राव

यूँ इलाज-ए-दिल बीमार किया जाएगा

अफ़ज़ल इलाहाबादी

मिरी दीवानगी की हद न पूछो तुम कहाँ तक है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

लुटा रहा हूँ मैं लाल-ओ-गुहर अँधेरे में

अफ़ज़ल इलाहाबादी

कोई न हर्फ़-ए-नवेद-ओ-ख़बर कहा उस ने

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

हिज्र-ज़ाद

आफ़ताब इक़बाल शमीम

पंजों के बल खड़े हुए शब की चटान पर

आफ़ताब इक़बाल शमीम

हर किसी का हर किसी से राब्ता टूटा हुआ

आफ़ताब इक़बाल शमीम

पते की बात भी मुँह से निकल ही जाती है

आफ़ताब हुसैन

क्या ख़बर मेरे ही सीने में पड़ी सोती हो

आफ़ताब हुसैन

वो सर से पाँव तक है ग़ज़ब से भरा हुआ

आफ़ताब हुसैन

करता कुछ और है वो दिखाता कुछ और है

आफ़ताब हुसैन

फ़सील-ए-शहर-ए-तमन्ना में दर बनाते हुए

आफ़ताब हुसैन

बस एक बात की उस को ख़बर ज़रूरी है

आफ़ताब हुसैन

क्या बताएँ हाल-ए-दिल उन की शनासाई के ब'अद

अफ़सर माहपुरी

यूँ ख़बर किसे थी मेरी तिरी मुख़बिरी से पहले

अफ़रोज़ आलम

आप से उन्स हुआ चाहता है

अफ़रोज़ आलम

शब ढली मेरी और सहर न हुई

अफ़ीफ़ सिराज

नज़्म

आदिल मंसूरी

जो चीज़ थी कमरे में वो बे-रब्त पड़ी थी

आदिल मंसूरी

घूम रहा था एक शख़्स रात के ख़ारज़ार में

आदिल मंसूरी

दूर उफ़ुक़ के पार से आवाज़ के पर्वरदिगार

आदिल मंसूरी

चेहरे पे चमचमाती हुई धूप मर गई

आदिल मंसूरी

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