धूल Poetry (page 12)

हाथ में लाठी पकड़ कर इश्क़ फ़रमाएँगे क्या

सय्यद फ़हीमुद्दीन

बदल के हम ने तरीक़ा ख़त-ओ-किताबत का

सय्यद आरिफ़ अली

आता है कोई हाथ अगर हात सफ़र में

सय्यद अारिफ़

पेच-दर-पेच सवालात में उलझे हुए हैं

सय्यद अमीन अशरफ़

मलाल-ए-ग़ुंचा-ए-तर जाएगा कभी न कभी

सय्यद अमीन अशरफ़

किसी ख़याल की रौ में था मुस्कुराते हुए

सय्यद अमीन अशरफ़

ख़ाकसारों से क़रीं रहता है

सय्यद अमीन अशरफ़

है इर्तिबात-शिकन दाएरों में बट जाना

सय्यद अमीन अशरफ़

शोला-ए-इश्क़ में जो दिल को तपाँ रखते हैं

सय्यद अहमद शमीम

हिज्र है दिल में ख़ाक उड़ती है

सय्यद अाग़ा अली महर

आई सहर क़रीब तो मैं ने पढ़ी ग़ज़ल

सय्यद आबिद अली आबिद

धीरे धीरे ढलते सूरज का सफ़र मेरा भी है

स्वप्निल तिवारी

बुलबुल ओ परवाना

सुरूर जहानाबादी

एक दिन मेरा आईना मुझ को

सुरेन्द्र शजर

तन्हा अपनी ज़ात लिए फिरता हूँ मैं

सूरज नारायण

ख़ुद ही पर ज़ुल्म ढाया जा रहा है

सुनील कुमार जश्न

तुझ में सब मंज़र महफ़ूज़

सुलतान सुबहानी

हम ने माना कि जहाँ हम थे गुलिस्ताँ तो न था

सुल्तान गौरी

सफ़र सफ़र मिरे क़दमों से जगमगाया हुआ

सुल्तान अख़्तर

तुझ को पाने के लिए ख़ाक-ए-तमन्ना हो जाऊँ

सुल्तान अख़्तर

तिलिस्म-ख़ाना-ए-दिल में है चार-सू रौशन

सुल्तान अख़्तर

तिलिस्म-ए-कार-ए-जहाँ का असर तमाम हुआ

सुल्तान अख़्तर

रक़्स करता है ब-अंदाज़-ए-जुनूँ दौड़ता है

सुल्तान अख़्तर

कुछ डूबता उभरता सा रहता है सामने

सुल्तान अख़्तर

झूट रौशन है कि सच्चाई नहीं जानते हैं

सुल्तान अख़्तर

दर-ब-दर की ख़ाक पेशानी पे मल कर आएगा

सुल्तान अख़्तर

निज़ाम-ए-शम्स-ओ-क़मर कितने दस्त-ए-ख़ाक में हैं

सुलैमान अरीब

हर बात तिरी जान-ए-जहाँ मान रहा हूँ

सुलैमान अरीब

तिरे हिरमाँ-नसीबों की भी क्या तक़दीर है साक़ी

सुलैमान आसिफ़

ज़रूरी कब है कि हर काम इख़्तियारी करें

सुहैल अख़्तर

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