चुपचाप Poetry (page 5)

उस के नाम जिसे तारीकी निगल चुकी

इंजिला हमेश

रक़्स-ए-आगही

इंजिला हमेश

ख़ुदा से कलाम

इंजिला हमेश

मौसम सूखा सूखा सा था लेकिन ये क्या बात हुई

इमाम अाज़म

'इश्क़ी'-साहिब लिखना है तो कोई नई तहरीर लिखो

इलियास इश्क़ी

ख़िरद को ख़ाना-ए-दिल का निगह-बाँ कर दिया हम ने

इज्तिबा रिज़वी

धुँद

इफ़्तेख़ार जालिब

अब बताओ जाएगी ज़िंदगी कहाँ यारो

हिमायत अली शाएर

सर-ए-दरबार ख़ामोशी तह-ए-दरबार ख़ुशियाँ हैं

हस्सान अहमद आवान

हो तेरी याद का दिल में गुज़र आहिस्ता आहिस्ता

हसन अकबर कमाल

उमीदों से दिल-ए-बर्बाद को आबाद करता हूँ

हरी चंद अख़्तर

इस तरह अहद-ए-तमन्ना को गुज़ारे जाइए

हनीफ़ अख़गर

फ़िक्र पाबंदी-ए-हालात से आगे न बढ़ी

हमीद नागपुरी

सारे मामूलात में इक ताज़ा गर्दिश चाहिए

हकीम मंज़ूर

आगे पीछे उस का अपना साया लहराता रहा

हकीम मंज़ूर

शाएर

हफ़ीज़ जालंधरी

निगाह-ए-आरज़ू-आमोज़ का चर्चा न हो जाए

हफ़ीज़ जालंधरी

जम्हूरियत

हबीब जालिब

कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ

गुलज़ार

ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी थी

गुलज़ार

हिरासत

गुलज़ार

फूल ने टहनी से उड़ने की कोशिश की

गुलज़ार

ओस पड़ी थी रात बहुत और कोहरा था गर्माइश पर

गुलज़ार

काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी

गुलज़ार

गर्म लाशें गिरीं फ़सीलों से

गुलज़ार

याद नहीं है

गुलनाज़ कौसर

सोते हैं वो आईना ले कर ख़्वाबों में बाल बनाते हैं

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

ऐ सितम-आज़मा जफ़ा कब तक

ग़ुलाम मौला क़लक़

रुख़-ए-निगार से है सोज़-ए-जावेदानी-ए-शमा

ग़ालिब

सामने आँखों के घर का घर बने और टूट जाए

गणेश बिहारी तर्ज़

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